वायनाड लैंडस्लाइड की जिसने पहली सूचना दी, उसकी बॉडी मिली:पीड़ित बोला- एक ही रात में 16 परिजन खोए; अब तक 365 मौतें, 206 लापता

केरल के वायनाड में 29 जुलाई की देर रात लैंडस्लाइड हुई। हादसा इतना भयावह था कि इससे मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ते जा रही है। अब तक 365 लोगों की मौत हो चुकी हैं। 206 लोग अब भी लापता हैं। लैंडस्लाइड के बाद से शुरू हुआ सर्च ऑपरेशन आज 7वें दिन (5 अगस्त) भी जारी है। PTI के मुताबिक, वायनाड के चूरलमाला के एक प्राइवेट हॉस्पिटल की स्टाफ नीतू जोजो इस हादसे की पहली इन्फॉर्मर थीं। उन्होंने इमरजेंसी सर्विस को सबसे पर अलर्ट कर मदद की गुहार लगाई थी। उन्होंने डॉ. शानावास पल्लियाल को भी फोन किया था, जो उसी हॉस्पिटल में डिप्टी जनरल मैनेजर हैं, जहां नीतू काम करती थीं। डॉ. पल्लियाल ने बताया कि 29 जुलाई को पहली लैंडस्लाइड के बाद नीतू का कॉल आया। उन्होंने घबराते हुए कहा- हमारे घरों में पानी भर गया है। घर के आस-पास मलबा है। आस-पास के 5-6 परिवार के लोग हमारे घर आ गए हैं, क्योंकि उनके घर तबाह हो गए हैं। इसके बाद दूसरी लैंडस्लाइड में उनसे कनेक्शन टूट गया। माना जा रहा है कि दूसरी लैंडस्लाइड में मलबे में दबने से उनकी मौत हो गई। इसके वायनाड के चूरलमाला में रहने वाले 42 वर्षीय मंसूर ने कहा- मैं उस दिन अपने घर पर नहीं था। मैंने एक ही रात में परिवार के 16 सदस्यों को खो दिया। अब तक 4 ही लोगों की बॉडी मिली है। बेटे की बॉडी मिली है। बटी समेत 12 लोग लापता हैं। पीड़ित ने कहा- मेरा परिवार, मेरा घर, सब कुछ चला गया
पीटीआई से बातचीत में मंसूर ने बताया कि इस घटना में मेरा परिवार, मेरा घर, सब कुछ चला गया। अब मेरे पास कुछ भी नहीं बचा है। मैं फिलहाल अपने भाई नासिर के साथ रह रहा हूं। लैंडस्लाइड वाली जगह से दूर रहने वाले​ मंसूर के भाई नासिर ने बताया कि घटना से पहले अधिकारियों की ओर से कोई चेतावनी नहीं दी गई थी। जब जलस्तर बढ़ रहा था, तो मैंने अपने भाई के परिवार को कहा कि वे मेरे घर आ जाएं। उन्होंने कहा कि वे सुरक्षित हैं, लेकिन इस त्रासदी में अब सब कुछ खत्म हो गया। घटनास्थल को मैप से समझें… सर्च ऑपरेशन के अपडेट्स वायनाड की लाइफलाइन रही चलियार नदी में अब तक 205 शव मिले
केरल की चलियार नदी से 3 अगस्त को रेस्क्यू टीमों ने 3 शव और 13 लोगों के शरीर के टुकड़े बरामद हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार, अब तक चलियार नदी से कुल 205 शव मिल चुके हैं। इनमें 73 शव और 132 शरीर के टुकड़े हैं। 198 शवों का पोस्टमॉर्टम हो चुका है और 195 को वायनाड भेज दिया है। 30 जुलाई की लैंडस्लाइड के बाद चलियार नदी तबाही का प्रतीक बन गई है। इससे पहले 169 किमी लंबी नदी वायनाड, मलप्पुरम और कोझिकोड जिले के लोगों के लिए लाइफलाइन रही है। नेवी, पुलिस, फायर, रेस्क्यू और NDRF की टीमों का चलियार नदी में सर्च ऑपरेशन जारी है। रेस्क्यू ऑपरेशन की तस्वीरें… 5 साल पहले भी यहां लैंडस्लाइड से 17 मौतें हुई थीं
वायनाड के 4 गांव मुंडक्कई, चूरलमाला, अट्टामाला और नूलपुझा में लैंडस्लाइड की घटना हुई है। 5 साल पहले 2019 में भी भारी बारिश की वजह से इन्हीं गांवों में लैंडस्लाइड हुई थी, जिसमें 17 लोगों की मौत हुई थी। 5 लोगों का आज तक पता नहीं चला। 52 घर तबाह हुए थे। वायनाड में लैंडस्लाइड की क्या वजह है
वायनाड, केरल के नॉर्थ-ईस्ट में है। यह केरल का एकमात्र पठारी इलाका है। यानी मिट्टी, पत्थर और उसके ऊपर उगे पेड़-पौधों के ऊंचे-नीचे टीलों वाला इलाका। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक, केरल का 43% इलाका लैंडस्लाइड प्रभावित है। वायनाड की 51% जमीन पर पहाड़ी ढलाने हैं। यानी लैंडस्लाइड की संभावना बहुत ज्यादा बनी रहती है। वायनाड का पठार वेस्टर्न घाट में 700 से 2100 मीटर की ऊंचाई पर है। मानसून की अरब सागर वाली ब्रांच देश के वेस्टर्न घाट से टकराकर ऊपर उठती है, इसलिए इस इलाके में मानसून सीजन में बहुत ज्यादा बारिश होती है। वायनाड में काबिनी नदी है। इसकी सहायक नदी मनंतावडी ‘थोंडारमुडी’ चोटी से निकलती है। लैंडस्लाइड के कारण इसी नदी में बाढ़ आने से भारी नुकसान हुआ है। यह खबर भी पढ़ें… वायनाड लैंडस्लाइड, 4 दिन बाद बचाए गए 4 आदिवासी बच्चे:रेस्क्यू टीम ने हथेली में भरकर पानी पिलाया, शरीर से बांधकर पहाड़ से उतारा वायनाड लैंडस्लाइड के चौथे दिन शुक्रवार को एक अच्छी खबर आई। वन अधिकारियों ने 8 घंटे के ऑपरेशन में एक दूरदराज आदिवासी इलाके से 4 बच्चों समेत 6 लोगों का रेस्क्यू किया। बच्चे एक से चार साल के हैं। पनिया समुदाय का यह आदिवासी परिवार पहाड़ी की चोटी पर एक गुफा में फंसा था। पूरी खबर पढ़ें…