आज स्वतंत्रता दिवस है। आज ही के दिन हमने अंग्रेजों की गुलामी से आजादी पाई थी। आजादी सबसे कीमती शय है। मनुष्य होने की बुनियादी शर्त है। इसका महत्व वही जानता है, जिसने आजादी के लिए कीमत चुकाई है। देश की आजादी, समाज की आजादी, विचारों की आजादी, सोचने और निर्णय लेने की आजादी की तरह एक आजादी और भी है, जो बहुत महत्वपूर्ण है। वो है रिश्तों में आजादी। लेकिन रिश्ते में आजादी की अवधारणा थोड़ी जटिल है क्योंकि यह आजादी और बंधन का एक सुंदर संतुलन है। बंधनों से आजाद होने और आजादी से बंध सकने के बीच एक जगह है, जहां समता और स्वतंत्रता की बुनियाद पर रिश्तों की नींव रखी जाती है। जवान होते बच्चे अक्सर अपने मां-बाप से ज्यादा आजादी देने की मांग करते हैं। ऑफिस में बॉस के सामने जूनियर्स फ्रीडम तो रोमांटिक रिश्ते में पार्टनर्स स्पेस की मांग करते हैं। कुछ वैवाहिक रिश्तों में पार्टनर्स एक-दूसरे पर आजादी न देने के आरोप भी लगाते हैं। आज रिलेशनशिप कॉलम में रिश्ते में आजादी के महत्व और इसकी जरूरत को समझने की कोशिश करेंगे। साथ ही यह भी जानेंगे कि रिश्ते में आजादी और निर्भरता का सही संतुलन कैसे बनाया जा सकता है। आखिर रिश्ते में स्वतंत्रता इतनी जरूरी क्यों है मैरिज डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक रिश्ते में आजादी बहुत जरूरी है क्योंकि यह दोनों पार्टनर्स को अपनी भावनाओं को खुलकर जाहिर करने की अनुमति देती है। आजादी से रिश्ते में भरोसा और समझ बढ़ती है और दोनों पक्ष एक दूसरे के साथ सहज महसूस कर पाते हैं। रिश्ते में अगर सभी पक्षों को जरूरी आजादी मिले तो इससे रिश्ता और पर्सनल वेलबीइंग को ये फायदे हो सकते हैं- पार्टनर को असल रूप में देखना चाहते हैं तो उसे आजादी दीजिए कहते हैं कि किसी शख्स का असल स्वभाव जानना हो तो उसके हाथों में सत्ता की डोर थमा दीजिए। इसी तरह बच्चा हो या रोमांटिक पार्टनर या फिर ऑफिस का जूनियर, अगर उसे उसके असली रुप और पूरी क्षमता में देखना चाहते हैं तो रिश्ते में उसे आजादी देनी पड़ेगी। उदाहरण के लिए अगर बच्चे पर जरूरत से ज्यादा बंदिशें लगाएं तो संभव है कि वह अपने किसी छिपे हुए हुनर को कभी जाहिर ही न कर पाए। इसी तरह दफ्तर में जूनियर शानदार आइडिया को मन में ही दबाकर रख लेगा क्योंकि वह अपनी बात जाहिर कर पाने के लिए सही आजाद महसूस नहीं कर पाता। इसलिए जरूरी है कि हर तरह के रिश्ते में सभी पक्षों को जरूरी स्वतंत्रता दी जाए ताकि वह अपने असल रूप में, पूरी क्षमता से प्यार या काम कर पाए और जिम्मेदारियों को निभा पाए। रिश्ते में आजादी की एक सीमा है, रिश्ते से न हों आजाद रिश्ते में आजादी की उम्मीद रखते हुए इस बाद का ख्याल रखना जरूरी है कि रिश्ते की बुनियाद ही आपसी समझौते से पड़ती है। ऐसे में अगर दोनों पक्ष अपनी-अपनी आजादी पर 100% अड़े रहें तो रिश्ते का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। इस बात का ख्याल रखना भी जरूरी है कि रिश्ते में आजादी किसी भी स्थिति में इतनी स्वछंद न हो कि वह रिश्ते से हमें आजाद होने के लिए प्रेरित करे। उदाहरण के लिए अगर कोई टीनएज लड़का देर से घर आने की आजादी चाहता है तो ऐसे में उसे अपने पेरेंट्स से बात करनी चाहिए। उन्हें अपनी जरूरतों के बारे में बताना चाहिए। साथ ही उन्हें इस बात का भरोसा दिलाना चाहिए कि थोड़ी देर बाहर रहने से कोई खतरा नहीं। लेकिन अगर इस आजादी को निगेटिव रूप में लिया जाए तो बच्चा अपने पेरेंट्स की हर अच्छी-बुरी बात को मानने से इनकार कर अपनी आजादी की दुहाई देगा। लेकिन इस स्थिति में वह बच्चा रिश्ते में आजाद नहीं हो रहा होता बल्कि वह रिश्ते से ही आजाद हो रहा होता है। वह रिश्ते को तोड़ रहा होता है। इसी तरह दफ्तर में स्वच्छंद आजादी की मांग मैनेजर और एम्पलॉई को अलग-अलग रास्ते पर ले जा सकती हैं। इससे उनकी टीम अप्रोच खत्म हो सकती है। रिश्ते की डोर को मजबूत रखते हुए हासिल करें आजादी रिश्ते में आजादी के महत्व और इसके साथ ही पॉजिटिव निर्भरता की जरूरत को समझने के बाद सवाल यह उठता है कि ऐसी आजादी कैसे हासिल करें कि रिश्ते की डोर भी मजबूत रहे और अपना पर्सनल स्पेस भी सिमटता हुआ नजर न आए। गॉटमैन इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार रिश्ते में आजादी हासिल करने के लिए ये उपाय मददगार साबित हो सकते हैं-