बॉलीवुड एक्टर जैकी श्रॉफ अपने अलग अंदाज और किरदारों के लिए जाने जाते हैं। मुंबइया अंदाज में उनकी बातचीत के सभी कायल हैं। वह इन दिनों लोगों को पर्यावरण को लेकर जागरुक कर रहे हैं। हाल ही में अंबानी फैमिली के वेडिंग फंक्शन में वह एक पौधा लेकर गए तो उनकी फोटो वायरल हो गई। कुछ लोगों ने मजाक बनाया तो कुछ ने सराहना भी की। वह योग दिवस के दिन भी हाथ में एक पौधा लिए हुए दिखे थे। लोगों से अपनी सांसों का ध्यान रखने को कह रहे थे। वह कई बार पारंपरिक भोजन करने की सलाह देते भी दिख जाते हैं। हाल ही में एक यूट्यूबर के साथ बातचीत में उन्होंने सभी कपल्स को प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले थैलेसीमिया (Thalassemia) टेस्ट करवाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि अगर माता और पिता थैलेसीमिया माइनर हैं तो बच्चा थैलेसीमिया मेजर के रूप में पैदा होगा। इसका मतलब है कि बच्चे को जिंदगी भर हर 15 दिन में नए खून की जरूरत पड़ेगी। थैलेसीमिया ऐसी बीमारी है, जो हमारे शरीर की हीमोग्लोबिन और स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) के उत्पादन की क्षमता को प्रभावित करती है। इससे एनीमिया की स्थिति बन सकती है। कई बार कंडीशन गंभीर भी हो सकती है। इसलिए आज ‘सेहतनामा’ में बात करेंगे थैलेसीमिया की। साथ ही जानेंगे कि- थैलेसीमिया क्या है यह एक वंशानुगत ब्लड डिसऑर्डर है। यह हमारे शरीर की हीमोग्लोबिन बनाने की क्षमता को प्रभावित करता है। लाल रक्त कोशिकाओं में एक प्रोटीन होता है, जिसे हीमोग्लोबिन कहते हैं। खून के जरिए पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम इसी प्रोटीन का है। इससे शरीर की अन्य कोशिकाओं को पोषण मिलता है। अगर किसी को थैलेसीमिया है तो उसकी बोन मैरो लाल रक्त कोशिकाएं कम बना पाएगी। इसका नतीजा यह होगा कि एनीमिया की स्थिति बन जाएगी। इसके अलावा ऑक्सीजन से वंचित होकर शरीर की अन्य कोशिकाओं की ऊर्जा कम हो जाएगी। यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। थैलेसेमिया जन्मजात बीमारी है। इसका मतलब है कि इसका हमारी लाइफस्टाइल से कोई सीधा संबंध नहीं है। हालांकि हमारी लाइफस्टाइल का इसके लक्षणों पर सीधा असर पड़ता है। इसके लक्षण क्या हैं थैलेसीमिया के लक्षण इसके लेवल और प्रकार के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। इनमें से कुछ लक्षण आम हैं।
ग्राफिक में देखिए। थैलेसीमिया होने के क्या कारण हैं थैलेसीमिया कितने प्रकार का होता है यह बीमारी मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है। इन सभी के लक्षणों और गंभीरता में फर्क हो सकता है। थैलेसीमिया और एनीमिया थैलेसीमिया होने पर लाल रक्त कोशिकाओं और हीमोग्लोबिन की सामान्य प्रोडक्टिविटी में कमजोरी आती है। इसलिए इसके कारण जल्दी ही एनीमिया की स्थिति बन सकती है। चूंकि लाल रक्त कोशिकाएं हमारे शरीर के सभी टिश्यूज और अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए जिम्मेदार होती हैं, इसलिए इन कोशिकाओं की कम संख्या का मतलब है कि शरीर में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं होगी। एनीमिया कभी हल्का तो कभी गंभीर हो सकता है। एनीमिया के निम्न लक्षण हैं। थैलेसीमिया के कॉम्प्लिकेशन क्या हैं हमारे शरीर में आयरन की अधिकता हो सकती है। ऐसा बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन के कारण या फिर बीमारी के कारण हो सकता है। बहुत अधिक आयरन हमारे हार्ट, लिवर और एंडोक्राइन सिस्टम को डैमेज कर सकता है। एंडोक्राइन सिस्टम में कई ग्लैंड्स होती हैं, जो कई हार्मोन्स के प्रोडक्शन के लिए जिम्मेदार हैं। ये हमारे शरीर की प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती हैं। इसमें समस्या आने मतलब है कि इसका प्रभाव पूरे शरीर पर पड़ेगा। किन्हें हो सकती है यह बीमारी क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, अगर माता-पिता में से किसी एक को थैलेसीमिया है तो बच्चे को माइनर थैलेसीमिया हो सकता है। अगर माता-पिता दोनों को थैलेसीमिया है तो 25% बच्चों को मेजर थैलेसीमिया होने की आशंका होती है। इसमें 25% बच्चे सामान्य हो सकते हैं। वहीं 50% को माइनर थैलेसीमिया की आशंका होती है। इसका इलाज क्या है आमतौर पर थैलेसीमिया माइनर के लिए किसी उपचार की जरूरत नहीं होती है। अगर लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव कर लिए जाएं तो बहुत सामान्य जिंदगी जी सकते हैं। कई थैलेसीमिया माइनर वाले लोगों को तो पूरी जिंदगी जीने के बाद भी ये अंदाजा नहीं होता है कि उन्हें थैलेसीमिया है। एनीमिया के हल्के लक्षण होने पर फोलिक एसिड के सिरप भी स्वस्थ रक्त कोशिकाएं बनाने में मदद कर सकते हैं।
ग्राफिक में देखिए। थैलेसीमिया होने के क्या कारण हैं थैलेसीमिया कितने प्रकार का होता है यह बीमारी मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है। इन सभी के लक्षणों और गंभीरता में फर्क हो सकता है। थैलेसीमिया और एनीमिया थैलेसीमिया होने पर लाल रक्त कोशिकाओं और हीमोग्लोबिन की सामान्य प्रोडक्टिविटी में कमजोरी आती है। इसलिए इसके कारण जल्दी ही एनीमिया की स्थिति बन सकती है। चूंकि लाल रक्त कोशिकाएं हमारे शरीर के सभी टिश्यूज और अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए जिम्मेदार होती हैं, इसलिए इन कोशिकाओं की कम संख्या का मतलब है कि शरीर में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं होगी। एनीमिया कभी हल्का तो कभी गंभीर हो सकता है। एनीमिया के निम्न लक्षण हैं। थैलेसीमिया के कॉम्प्लिकेशन क्या हैं हमारे शरीर में आयरन की अधिकता हो सकती है। ऐसा बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन के कारण या फिर बीमारी के कारण हो सकता है। बहुत अधिक आयरन हमारे हार्ट, लिवर और एंडोक्राइन सिस्टम को डैमेज कर सकता है। एंडोक्राइन सिस्टम में कई ग्लैंड्स होती हैं, जो कई हार्मोन्स के प्रोडक्शन के लिए जिम्मेदार हैं। ये हमारे शरीर की प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती हैं। इसमें समस्या आने मतलब है कि इसका प्रभाव पूरे शरीर पर पड़ेगा। किन्हें हो सकती है यह बीमारी क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, अगर माता-पिता में से किसी एक को थैलेसीमिया है तो बच्चे को माइनर थैलेसीमिया हो सकता है। अगर माता-पिता दोनों को थैलेसीमिया है तो 25% बच्चों को मेजर थैलेसीमिया होने की आशंका होती है। इसमें 25% बच्चे सामान्य हो सकते हैं। वहीं 50% को माइनर थैलेसीमिया की आशंका होती है। इसका इलाज क्या है आमतौर पर थैलेसीमिया माइनर के लिए किसी उपचार की जरूरत नहीं होती है। अगर लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव कर लिए जाएं तो बहुत सामान्य जिंदगी जी सकते हैं। कई थैलेसीमिया माइनर वाले लोगों को तो पूरी जिंदगी जीने के बाद भी ये अंदाजा नहीं होता है कि उन्हें थैलेसीमिया है। एनीमिया के हल्के लक्षण होने पर फोलिक एसिड के सिरप भी स्वस्थ रक्त कोशिकाएं बनाने में मदद कर सकते हैं।