रिलेशनशिप- पुरानी बुरी यादों को कैसे भूलें:अतीत बीत चुका, वर्तमान सामने है, माइंडफुलनेस की प्रैक्टिस करें, ये 10 तरीके हैं मददगार

कहते हैं कि हमारा वर्तमान हमारे अतीत की परछाईं भर होता है। साथ ही यही भविष्य की दिशा-दशा निर्धारित करता है। इस फलसफे के मुताबिक देखें तो हम आज क्या हैं और आगे क्या होंगे, इसका बीज कहीं-न-कहीं हमारे अतीत की घटनाओं में ही छिपा होता है। लेकिन क्या हो अगर अतीत की यादें कड़वी हों। ऐसी याद जो सताने लगे, वर्तमान और भविष्य के सपनों को नुकसान पहुंचाने लगे। ऐसी स्थिति में बुरी यादों को पीछे छोड़ने की सलाह दी जाती है। पुरानी कहावत रही है कि वर्तमान को दो ही लोग जीते हैं, एक योगी या भोगी। एक कालखंड में यदि समय के टुकड़े करें तो सबसे बारीक है वर्तमान। इसीलिए वर्तमान को समझ लें तो योग, और न समझें तो भोग। इसीलिए विद्वानों, साधु-संतों ने कहा है कि अतीत को छोड़ो, वर्तमान को पकड़ो और भविष्य से अपने आपको जोड़ो। ‘रिसर्च गेट’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, अतीत को याद करना और भविष्य की कल्पना करना ‘मेंटल टाइम ट्रेवल’ की पहचान है। यानी हम दिमाग में ही उन यादों या सपनों के बारे में सोचकर उस वक्त (भूतकाल या भविष्य) में पहुंच जाते हैं। इन चीजों का हमारे जीवन के वर्तमान पर गहरा असर पड़ता है। लेकिन सवाल यह भी है कि ऐसी यादों से पीछा कैसे छुड़ाया जाए। आज ‘रिलेशनशिप’ कॉलम में रिसर्च की मदद से अपने अतीत को भूलने और नई शुरुआत करने के कुछ टिप्स जानेंगे। अतीत की बुरी यादों को भूलना क्यों है जरूरी क्या आप आज भी अपने अतीत के बारे में सोच-विचार करते हैं। अपनी गलतियों को लेकर पछता रहे हैं या फिर बिछड़ों को याद कर रहे हैं। यही यादें आपको अपने जीवन में आगे बढ़ने से रोक रही हैं। यही एक कारण हो सकता है कि आप अपने जीवन में नए सुखद अनुभवों को नहीं जोड़ पा रहे हैं। कुछ यादों को कभी-कभी भूलना वाकई मुश्किल हो सकता है। हमारा दिमाग उन यादों को नहीं भूल पाता है, जो गंभीर या दर्दनाक होती हैं। यही यादें हमारे दिल-दिमाग पर हावी हो सकती हैं। जर्नल ऑफ साइकोलॉजी एंड साइकोथेरेपी के मुताबिक, नकारात्मक यादें लोगों को गुस्सा, मायूसी, उदासी और शर्मिंदगी जैसी भावनाएं महसूस करने के लिए मजबूर कर सकती हैं। यह स्ट्रेस और एंग्जाइटी का कारण भी हो सकती हैं। लेखिका शैली काइर ने अतीत से जुड़ी यादों पर एक किताब लिखी है- ‘द हीलिंग पॉवर ऑफ पास्ट लाइफ मेमोरीज’। इस किताब में उन्होंने बताया है कि पिछले जीवन की यादों को कैसे दूर किया जाए। चिंता, अवसाद और आघात से राहत पाने के लिए इसमें कुछ रिलीफ टिप्स भी दी गई हैं। डर, भय, घबराहट, ओसीडी और पीटीएसडी (पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) पर काबू पाने में इसमें दी गईं कुछ प्रेरक कहानियां आपको आशा से भर देंगी। यादें भ्रम-भय पैदा करती हैं, इन्हें भूलना संभव अतीत की यादें भ्रम और भय पैदा करती हैं। वहीं बात करें भविष्य की तो सपने और कल्पनाएं इसकी पूंजी हैं, जो हमें बेचैन रखती हैं। प्रकृति का खास तोहफा है वर्तमान यानी बस आज का क्षण। यदि वर्तमान में जीना चाहें तो यह मालूम होना चाहिए कि हम तीन चीजों से बने हैं- शरीर, मन और आत्मा। शरीर और मन तो हमें कई चीजों में अटकाए रखते हैं, लेकिन आत्मा शांति देती है। यदि हम वर्तमान में आत्मा के साथ जिएंगे तो दुनिया में आपसे ज्यादा शांत, सौम्य, विनम्र और जीवन के हर पल का आनंद उठाने वाला कोई दूसरा नहीं होगा। दुखद अतीत को भूलने के लिए ये मनोवैज्ञानिक टिप्स मददगार साबित हो सकते हैं- इसलिए जब आपके अतीत की बुरी यादें बार-बार आपके सामने आएं तो वर्तमान में हो रही किसी चीज के बारे में सोचकर अपना ध्यान भटकाएं। माइंडफुलनेस का ज्यादा-से-ज्यादा अभ्यास करें। स्टोरी का निचोड़ यही है कि अच्छी यादों को दिल में जगह दें और बुरी यादों को बाहर का रास्ता दिखाएं। ताकि अतीत की काली छाया वर्तमान या भविष्य को नुकसान न पहुंचा पाए।