केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रायपुर में वामपंथी उग्रवाद की समीक्षा की। इस बैठक में 7 राज्यों अफसरों के साथ करीब 4 घंटे तक बातचीत की गई। मीटिंग में अलग-अलग राज्यों के DGP, पैरा मिलिट्री फोर्स के चीफ और राज्य सरकार के सचिवों को बुलाया गया। बैठक के बाद शाह ने कहा कि, मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद खत्म हो जाएगा। मैं मानता हूं कि अब समय आ गया है कि वामपंथी उग्रवाद की समस्या पर एक मजबूत रणनीति के साथ रुथलेस रणनीति के साथ अंतिम प्रहार किया जाए। वामपंथी उग्रवाद लोकतंत्र व्यवस्था के लिए चैलेंज है। बैठक के बाद शाह की प्रमुख बातें पहली बैठक इंटरस्टेट कोऑर्डिनेशन की हुई। इसमें छत्तीसगढ़ के साथ झारखंड, ओडिशा, मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र के अफसरों ने प्रदेश में नक्सल स्थिति का ब्योरा दिया। वहीं दूसरी बैठक छत्तीसगढ़ को लेकर की जा रही है। दूसरी बैठक छत्तीसगढ़ के वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा और विकास की योजनाओं पर शाह बात कर रहे हैं। नियद नेल्लानार योजना पर छत्तीसगढ़ के अब तक किए कामों की जानकारी प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा दे रहे हैं। इन जिलों में अधिक एक्टिव हैं नक्सली छत्तीसगढ़- बीजापुर, दंतेवाडा, धमतरी, गरियाबंद, कांकेर, कोंडागांव, महासमुंद, नारायणपुर, राजनांदगांव, मोहल्ला मानपुर, आबगढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, सुकमा, कबीरधाम और मुंगेली जिले हैं। ओडिशा- कालाहांडी, कंधमाल, बोलांगीर, मलकानगिरी, नबरंगपुर, नुआपाड़ा और रायगढ़ नक्सल प्रभावित जिलों में शामिल है। झारखंड- पांच जिले गिरिडीह, गुमला, लातेहार, लोहरदगा और पश्चिमी सिंहभूमि इसमें शामिल हैं। आंध्रप्रदेश- अल्लूरी सीतारमा राजू, पूर्वी गोदावरी, पार्वतीपुरम मान्यम, श्रीकाकुलम और विशाखापत्तनम जिले शामिल हैं । मध्यप्रदेश- बालाघाट,मंडला जिले और डिंडोरी जिले में नक्सलियों का प्रभाव दिखता है। केरल- वायनाड़ और कुन्नूर, महाराष्ट्र में गढ़चिरौली और गोंदिया, तेलंगाना में भाद्राद्री-कोथागुड़ेम और मुगुलू जिलों में नक्सलियों का दबदबा है। नक्सली बनाना चाहते हैं अपनी सरकार भारत में नक्सलवाद की शुरुआत 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी से हुई थी। शुरू में पुलिस ने इस विद्रोह को कुचलने की कोशिश की, लेकिन दशकों बाद यह आंदोलन झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में फैल गया। नक्सलवाद की शुरुआत चारु माजूमदार और कानू सान्याल ने की थी। साल 1969 में इन दोनों ने भूमि अधिग्रहण को लेकर पूरे देश में सत्ता के ख़िलाफ़ आंदोलन शुरू किया था। आंदोलनकारी नेताओं का मानना था कि ज़मीन उसी को होनी चाहिए जो उस पर खेती करें। बाद में इस आंदोलन में छात्र भी शामिल हो गए। नक्सलवाद के ज़रिए कुछ कम्युनिस्ट गुरिल्ला युद्ध के ज़रिए राज्य को अस्थिर करना चाहते हैं. वे मौजूदा शासन व्यवस्था को उखाड़ फेंककर लगातार युद्ध के ज़रिए ‘जनताना सरकार’ लाना चाहते हैं। बैठक से पहले पहुंचे चंपारण बैठक से पहले केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चंपारण में चंपेश्वर महादेव की पूजा-अर्चना की। वे वल्लभाचार्य मंदिर में भी गए। उनके साथ सीएम साय और डिप्टी सीएम शर्मा भी मौजूद रहे। पूरी खबर और तस्वीरों के लिए यहां क्लिक करें