जरूरत की खबर- ITR भरने के बाद रिफंड में देरी:रिफंड का पैसा कब तक आना चाहिए, रिफंड में देरी हो तो क्या करें

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की समय सीमा 31 जुलाई, 2024 को समाप्त हो चुकी है, जिसमें 7.28 करोड़ से ज्यादा टैक्सपेयर्स ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर दिया था। यह पिछले वर्ष की तुलना में 7.5% अधिक है। 23 अगस्त तक आयकर विभाग ने इनमें से 5.34 करोड़ रिटर्न प्रोसेस कर दिए थे। इनमें कुछ टैक्सपेयर्स को ITR फाइल करने के कुछ दिन बाद ही रिफंड मिल गया। जबकि कुछ टैक्सपेयर्स को अभी भी रिफंड का इंतजार है। वर्तमान में 2 करोड़ से अधिक वेरिफाइड ITR अनप्रोसेस्ड पड़े हैं। इसलिए आज जरूरत की खबर में बात करेंगे कि रिफंड मिलने में देरी के पीछे क्या कारण है? साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: दीक्षा शुक्ला, फाइनेंशियल एक्सपर्ट, गुरुग्राम (हरियाणा) सवाल- ITR प्रोसेसिंग में कितना समय लगता है? जवाब- फाइनेंशियल एक्सपर्ट दीक्षा शुक्ला कहती हैं कि आयकर विभाग को ई-वेरिफिकेशन की तारीख के बाद ITR प्रोसेसिंग में 15 से 45 दिन का समय लगता है। अगर ऑफलाइन वेरिफिकेशन होता है तो समय सीमा बढ़ा दी जाती है। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के बाद इसे वित्तीय वर्ष के अंत से 9 महीने के भीतर प्रोसेस किया जाना चाहिए। यानी वित्त वर्ष 2023-24 के लिए फाइल किए गए ITR के लिए रिफंड 31 दिसंबर, 2025 तक या उससे पहले प्राप्त किया जाएगा। अगर प्रोसेसिंग में ज्यादा समय लग रहा है तो इसका मतलब है कि आयकर विभाग आपके रिटर्न का रिव्यू कर रहा है। ITR बहुत देरी से प्रोसेस होने पर टैक्सपेयर्स इनकम टैक्स पोर्टल पर जाकर इसकी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। अगर इस बीच में रिफंड नहीं मिलता है तो टैक्सपेयर्स को अपने ITR इंटिमेशन मैसेज को चेक करते रहना चाहिए। साथ ही ITR रिफंड को लेकर आयकर विभाग द्वारा भेजे गए नोटिफिकेशन के ईमेल को चेक करते रहना चाहिए। सवाल- ITR रिफंड में देरी क्यों होती है? जवाब- ITR के रिफंड में देरी की कॉमन वजह है वेरिफिकेशन। आयकर विभाग द्वारा वेरिफिकेशन के दौरान सभी चीजों को बहुत बारीकी से देखा जाता है। जैसेकि- टैक्सपेयर इनकम रिफंड पर ब्याज पाने का पात्र है। जब निर्धारित समय सीमा के भीतर आयकर रिटर्न फाइल किया जाता है तो टैक्सपेयर 1 अप्रैल, 2024 से रिफंड की तारीख तक कैलकुलेट की गई 0.5% प्रति माह या एक महीने के हिस्से पर ब्याज का हकदार होता है। हालांकि, यह ब्याज तभी दिया जाता है, जब रिफंड की राशि वास्तविक टैक्स लायबिलिटी के 10% से अधिक हो। सवाल- टैक्स रिफंड में देरी होने पर टैक्सपेयर्स क्या कर सकते हैं? जवाब- अगर आपके इनकम टैक्स रिफंड में देरी हो रही है तो सबसे पहले आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर अपना स्टेटस चेक करना चाहिए। यह आपको प्रोसेसिंग की मौजूदा स्थिति से अवगत कराएगा। नीचे दिए ग्राफिक से समझिए कि ITR रिफंड में सामान्य से अधिक समय लगने पर टैक्सपेयर्स कहां पूछताछ कर सकते हैं। सवाल- अपनी ITR प्रोसेसिंग स्थिति को कैसे ट्रैक कर सकते हैं? जवाब- अगर आप अपनी टैक्स लायबिलिटी का सही ढंग से कैलकुलेशन करना चाहते हैं और जरूरत से अधिक टैक्स का भुगतान किए जाने की स्थिति में रिफंड चाहते हैं तो आपको अपना ITR नियमित रूप से और समय सीमा के भीतर फाइल करना चाहिए। नियमित रूप से अपनी इनकम टैक्स रिफंड की स्थिति की जांच करने और किसी भी समस्या का तुरंत समाधान करने से आपका समय बच सकता है। टैक्सपेयर्स के लिए अपने टैक्स रिफंड को ट्रैक करना और मैनेज करना ऑनलाइन के जरिए पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है। नीचे दिए ग्राफिक से समझिए कि ITR प्रोसेसिंग को ट्रैक कैसे कर सकते हैं। सरकार उन व्यक्तियों को टैक्स रिटर्न दाखिल करने के लिए बाध्य करती है, जो सालाना 2.5 लाख रुपये से अधिक कमाते हैं। अगर आप सालाना इस राशि से अधिक कमाते हैं तो आपको हर साल 31 जुलाई से पहले अपना ITR दाखिल करना होगा। जो उन व्यक्तियों के मामले में हर साल आयकर रिटर्न दाखिल करने की नियत तारीख है, जो टैक्स ऑडिट के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। आप अपने इनकम टैक्स रिफंड का स्टेटस आसानी से देख सकते हैं। इसमें मूल्यांकन का वर्ष, वर्तमान स्थिति, किसी भी रिफंड के फेल होने के कारण और पेमेंट का तरीका जैसी डिटेल्स देख सकते हैं।