जरूरत की खबर- महिला सुरक्षा से जुड़े 6 जरूरी ऐप:अपने फोन में जरूर रखें, इमरजेंसी यूज करना सीखें, जानें इससे जुड़े जरूरी फीचर

निर्भया केस के बाद महिलाओं सुरक्षा से जुड़े नए कड़े कानून बनाए गए। उम्मीद थी कि इससे जमीनी स्थिति में थोड़ा बदलाव आएगा, लेकिन हुआ इसका ठीक उलटा। महिलाओं की सुरक्षा हमेशा से ही चिंता का विषय रहा है, लेकिन अब यह चिंता वक्त के साथ और बढ़ती जा रही है। हिंसा की ये घटनाएं किसी एक राज्य, शहर, कस्बे या देश तक सीमित नहीं हैं। महिलाओं के साथ बलात्कार, एसिड अटैक, हिंसा और उत्पीड़न की घटनाएं दुनियाभर से सुनने को मिलती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के मुताबिक हर 3 में से एक महिला अपने जीवनकाल में कभी-न-कभी फिजिकल या सेक्शुअल वॉयलेंस का शिकार होती है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े भी यही बताते हैं कि भारत में हर घंटे महिलाओं के खिलाफ अपराध के 51 मामले दर्ज होते हैं। इन आपराधिक घटनाओं से बचने के लिए महिलाओं में जागरूकता भी बहुत जरूरी है। इसके लिए सबसे अच्छा हथियार है आपका स्मार्टफोन। आज स्मार्टफोन में कुछ ऐसे वुमन सेफ्टी एप्लिकेशन आते हैं, जिनकी मदद से महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध में कमी लाई जा सकती है। खास बात यह है कि अधिकांश वुमन सेफ्टी ऐप बिल्कुल फ्री हैं। इसलिए आज जरूरत की खबर में बात वुमन सेफ्टी एप्लिकेशन की। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर (उत्तर प्रदेश पुलिस) सवाल- हर महिला के स्मार्टफोन में वुमन सेफ्टी ऐप्स होने क्यों जरूरी हैं? जवाब- वुमन सेफ्टी ऐप्स का महिलाएं किसी भी मुसीबत के समय इस्तेमाल कर सकती हैं। ये ऐप्स केवल एक बटन पर तत्काल मदद पहुंचाने का भरोसा देते हैं। विशेषकर छात्राओं और वर्किंग वुमन के लिए ये सेफ्टी ऐप्स बेहद जरूरी हैं क्योंकि उन्हें कई बार अकेले ट्रैवल करना पड़ता है। अधिकांश वुमन सेफ्टी ऐप्स में SOS यानी Save Our Souls का ऑप्शन होता है। यह एक प्रकार का कॉल है, जो आपके डिवाइस से सभी इमरजेंसी नंबर्स पर कॉल करता है। नीचे दिए ग्राफिक से समझिए कि वुमन सेफ्टी ऐप्स के इस्तेमाल से किस तरह के फायदे हैं। सवाल- मुसीबत के समय इमरजेंसी में ऐप खोलने का टाइम कहां होता है। ऐसे में क्या ये ऐप सचमुच उपयोगी हो सकते हैं? जवाब- इन सेफ्टी ऐप्स को इसी सोच के साथ डिजाइन किया गया है कि जब कोई महिला मुसीबत में हो तो जाहिर है, उसके पास फोन खोलने, ऐप में जाने, अलर्ट भेजने का टाइम नहीं होगा। ये भी हो सकता है कि कई बार फोन नेटवर्क एरिया में न हो, उस इलाके में इंटरनेट न हो या फोन स्विच ऑफ हो गया हो। लेकिन ये सेफ्टी ऐप्स इन सबके बावजूद काम करते हैं। नीचे ग्राफिक में देखिए कि इस ऐप्स के फीचर्स कैसे काम करते हैं। सवाल- वो कौन से वुमन सेफ्टी ऐप्स हैं, जो हर महिला को अपने स्मार्टफोन में रखने चाहिए? जवाब- वर्तमान में बहुत सारे वुमन सेफ्टी ऐप्स मौजूद हैं, जो जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी अलर्ट कर सकते हैं। इन ऐप्स में मल्टीपल लोकेशन शेयरिंग का विकल्प होता है, जिसके जरिए घर से बाहर जाने पर आप अपने परिवारजनों और दोस्तों से अपनी लोकेशन शेयर कर सकते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से समझिए कि सेफ्टी के लिए महिलाओं को कौन से ऐप्स अपने मोबाइल में जरूर रखने चाहिए। आइए, ग्राफिक में दिए ऐप्स के बारे में डिटेल्स में समझते हैं। 112 India (112 इंडिया) bSafe (बी सेफ)- My Safetipin (माय सेफ्टीपिन)- Shake2Safety (शेक टू सेफ्टी)- Smart24*7 (स्मार्ट 24*7)- रक्षा ऐप- अगर टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल किया जाए तो यह किसी वरदान से कम नहीं है। महिलाओं के साथ होने वाली आपराधिक घटनाओं को इन ऐप्स की मदद से काफी हद तक कम किया जा सकता है। अगर आप रात में अकेले किसी काम से घर से बाहर जाते हैं या किसी ऐसे एरिया में रहते हैं, जहां आए दिन आपराधिक घटनाएं होती हैं तो ये ऐप्स सिक्टोरिटी की दृष्टि से मददगार साबित हो सकते हैं।