आपने देखा होगा कि कुछ लोग अच्छा काम करते हैं, इसके बावजूद उन्हें बेहतर मौके नहीं मिलते हैं। वहीं, उनके साथ काम कर रहे खूबसूरत दिखने वाले चेहरों को कम मेहनत के बावजूद, दूसरों के मुकाबले ज्यादा मौके मिलते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे क्या वजह हो सकती है? दरअसल, इसे ‘प्रिटी प्रिविलेज’ कहा जाता है। हमारे समाज में आकर्षक और सुंदर दिखने वाले लोगों को आमतौर पर, कम सुंदर दिखने वाले लोगों की तुलना में अधिक बुद्धिमान, समझदार और काबिल समझा जाता है। इसे हॉलो इफेक्ट कहते हैं। खूबसूरत चेहरों को हमारे समाज में कई तरह के फायदे मिलते हैं। आपने ध्यान दिया होगा कि क्लासरूम से लेकर ऑफिस स्पेस तक सुंदर दिखने वाले लोगों को स्पेशल अटेंशन मिलता है। दरअसल, ‘प्रिटी प्रिविलेज’ एक ऐसी सच्चाई है, जिसे स्वीकारना मुश्किल है, लेकिन नकारना नामुमकिन। ऐसे में आइए आज रिलेशनशिप में जानते हैं कि- ‘प्रिटी प्रिविलेज’ के पीछे क्या कारण है? साइंस डायरेक्ट पर पब्लिश्ड एक रिसर्च के मुताबिक, खूबसूरत दिखने वाले चेहरों को बुद्धिमान समझा जाता है। लोग समझते हैं कि सुंदर लोगों का व्यवहार दोस्ताना होता है। साथ ही लोग मानते हैं कि खूबसूरत लोगों में अन्य लोगों की तुलना में ज्यादा कॉन्फिडेंस होता है। इसके पीछे का कारण हॉलो इफेक्ट है, जिसमें समझा जाता है कि जो कुछ भी सुंदर दिख रहा है वह अच्छा है। ‘प्रिटी प्रिविलेज’ का जीवन पर प्रभाव यह एक सामाजिक और मनोवैज्ञानिक धारणा है। इसमें सुंदर लोगों को जाने-अनजाने में अधिक अवसर और सहूलियतें मिलती हैं। यह विशेषाधिकार कई प्रोफेशन में देखने को मिलता है, जहां खूबसूरत लोगों को ज्यादा पसंद किया जाता है। ऐसे लोगों को आसानी से नौकरी, दोस्त और प्यार मिल जाता है। आइए इसे ग्राफिक के जरिए समझते हैं। आइए विस्तार से समझते हैं प्रोफेशनल लाइफ पर प्रभाव
अमेरिकी लेखक डेनियल हैमरमेश की किताब ब्यूटी पेज के मुताबिक, सुंदर लोगों को न केवल अधिक सैलरी मिलती है, बल्कि उन्हें सामाजिक रूप से अधिक सक्षम और आत्मविश्वासी भी माना जाता है। इन लोगों को नौकरी और प्रमोशन के अधिक अवसर मिलते हैं। खासकर, फैशन और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में खूबसूरत लोगों को खूब ‘प्रिटी प्रिविलेज’ मिलता है। सोशल लाइफ पर प्रभाव ‘प्रिटी प्रिविलेज’ लोगों की प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ सोशल लाइफ पर भी गहरा प्रभाव डालता है। ऐसे लोगों को बचपन से ही पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिलता है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। समाज में अधिक स्वीकृति और करियर में ढेरों मौके मिलने के कारण वे अधिक सहज महसूस करते हैं। इसे इस उदाहरण से समझ सकते हैं कि इंस्टाग्राम, फेसबुक या स्नैपचैट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सुंदर लोगों को अधिक लाइक्स, फॉलोअर्स मिलते हैं। बड़े ब्रांड्स भी विज्ञापन के लिए सुंदर इन्फ्लुएंसर्स को अधिक मौके देते हैं। कई बार सुंदर लोगों की गलतियां नजरअंदाज कर दी जाती हैं, जबकि अन्य लोगों को अधिक आलोचना झेलनी पड़ती है। क्या सुंदर लोगों को इसका नुकसान भी होता है? आमतौर पर हमें लगता है कि सुंदर दिखना फायदेमंद है, लेकिन कभी-कभी कुछ लोगों की सुंदरता के कारण उनकी काबिलियत को नजरअंदाज भी किया जाता है। आइए इसे ग्राफिक्स के जरिए समझते हैं। ‘प्रिटी प्रिविलेज’ को कैसे मात दें? डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी बताते हैं कि हमारे समाज में लोग सुंदरता को ज्यादा महत्व देते हैं। यही वजह है कि कुछ लोग इसे अपनी पहचान का हिस्सा बना लेते हैं। हालांकि, एक अच्छी बात यह है कि आप खूबसूरती की परिभाषा को अपने तरीके से बदल सकते हैं और एक नई सोच विकसित कर सकते हैं। यहां हम कुछ ऐसे आसान तरीकों के बारे में चर्चा करेंगे, जिससे आप अपने नजरिए को बदल सकते हैं। बॉडी न्यूट्रैलिटी: आपके लिए अगर बॉडी पॉजिटिविटी मुश्किल है तो बॉडी न्यूट्रैलिटी को अपनाना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि आप अपने शरीर को सिर्फ देखने की चीज न समझें, बल्कि उसकी ताकत और क्षमताओं को पहचानें। शरीर की खूबसूरती से ज्यादा उसकी कार्यक्षमता को महत्व दें। सेल्फ एक्सेप्टेंस: समाज आपको अपनाए या न अपनाए, सबसे जरूरी है कि आप खुद को अपनाएं। यह समझना जरूरी है कि आपकी खूबसूरती या दूसरों से तुलना आपके सेल्फ-वर्थ को तय नहीं करती है। अपने बारे में पॉजिटिव बात करना शुरू करें। सेल्फ कॉन्फिडेंस हाई रखें। अगर आपको निगेटिव बातें परेशान कर रही हैं तो थेरेपी की मदद लें। पॉजिटिव सर्कल: ऐसे दोस्तों और लोगों के साथ रहें, जो आपको बिना किसी कंडीशन के पसंद करें। दूसरों से तुलना करने वाले लोगों से दूर रहें। वास्तव में अच्छे बनें: जो लोग वाकई में अच्छे हैं, वे सुंदर भी माने जाते हैं। दयालु, ईमानदार और सहानुभूति रखने वाले लोग समय के साथ ज्यादा खूबसूरत लगने लगते हैं। पहली नजर में कई सारे लोग कुछ खास नहीं लगते हैं और लोग उन्हें पसंद नहीं करते हैं, लेकिन उनकी अच्छाई धीरे-धीरे उन्हें सुंदर बना देती है। खुद की सोच पर विचार करें: समाज के बोलने से पहले खुद से पूछें कि क्या मैं दूसरों को उनके लुक्स के आधार पर जज करता हूं? अगर आप अपने सुंदर दिखने का लाभ उठाते हैं तो उन लोगों के अनुभवों को समझने की कोशिश करें, जो इससे वंचित है। ये बात समझना जरूरी है कि लोग आपको सिर्फ लुक्स से नहीं, बल्कि आपकी असली काबिलियत से पहचाने।
अमेरिकी लेखक डेनियल हैमरमेश की किताब ब्यूटी पेज के मुताबिक, सुंदर लोगों को न केवल अधिक सैलरी मिलती है, बल्कि उन्हें सामाजिक रूप से अधिक सक्षम और आत्मविश्वासी भी माना जाता है। इन लोगों को नौकरी और प्रमोशन के अधिक अवसर मिलते हैं। खासकर, फैशन और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में खूबसूरत लोगों को खूब ‘प्रिटी प्रिविलेज’ मिलता है। सोशल लाइफ पर प्रभाव ‘प्रिटी प्रिविलेज’ लोगों की प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ सोशल लाइफ पर भी गहरा प्रभाव डालता है। ऐसे लोगों को बचपन से ही पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिलता है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। समाज में अधिक स्वीकृति और करियर में ढेरों मौके मिलने के कारण वे अधिक सहज महसूस करते हैं। इसे इस उदाहरण से समझ सकते हैं कि इंस्टाग्राम, फेसबुक या स्नैपचैट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सुंदर लोगों को अधिक लाइक्स, फॉलोअर्स मिलते हैं। बड़े ब्रांड्स भी विज्ञापन के लिए सुंदर इन्फ्लुएंसर्स को अधिक मौके देते हैं। कई बार सुंदर लोगों की गलतियां नजरअंदाज कर दी जाती हैं, जबकि अन्य लोगों को अधिक आलोचना झेलनी पड़ती है। क्या सुंदर लोगों को इसका नुकसान भी होता है? आमतौर पर हमें लगता है कि सुंदर दिखना फायदेमंद है, लेकिन कभी-कभी कुछ लोगों की सुंदरता के कारण उनकी काबिलियत को नजरअंदाज भी किया जाता है। आइए इसे ग्राफिक्स के जरिए समझते हैं। ‘प्रिटी प्रिविलेज’ को कैसे मात दें? डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी बताते हैं कि हमारे समाज में लोग सुंदरता को ज्यादा महत्व देते हैं। यही वजह है कि कुछ लोग इसे अपनी पहचान का हिस्सा बना लेते हैं। हालांकि, एक अच्छी बात यह है कि आप खूबसूरती की परिभाषा को अपने तरीके से बदल सकते हैं और एक नई सोच विकसित कर सकते हैं। यहां हम कुछ ऐसे आसान तरीकों के बारे में चर्चा करेंगे, जिससे आप अपने नजरिए को बदल सकते हैं। बॉडी न्यूट्रैलिटी: आपके लिए अगर बॉडी पॉजिटिविटी मुश्किल है तो बॉडी न्यूट्रैलिटी को अपनाना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि आप अपने शरीर को सिर्फ देखने की चीज न समझें, बल्कि उसकी ताकत और क्षमताओं को पहचानें। शरीर की खूबसूरती से ज्यादा उसकी कार्यक्षमता को महत्व दें। सेल्फ एक्सेप्टेंस: समाज आपको अपनाए या न अपनाए, सबसे जरूरी है कि आप खुद को अपनाएं। यह समझना जरूरी है कि आपकी खूबसूरती या दूसरों से तुलना आपके सेल्फ-वर्थ को तय नहीं करती है। अपने बारे में पॉजिटिव बात करना शुरू करें। सेल्फ कॉन्फिडेंस हाई रखें। अगर आपको निगेटिव बातें परेशान कर रही हैं तो थेरेपी की मदद लें। पॉजिटिव सर्कल: ऐसे दोस्तों और लोगों के साथ रहें, जो आपको बिना किसी कंडीशन के पसंद करें। दूसरों से तुलना करने वाले लोगों से दूर रहें। वास्तव में अच्छे बनें: जो लोग वाकई में अच्छे हैं, वे सुंदर भी माने जाते हैं। दयालु, ईमानदार और सहानुभूति रखने वाले लोग समय के साथ ज्यादा खूबसूरत लगने लगते हैं। पहली नजर में कई सारे लोग कुछ खास नहीं लगते हैं और लोग उन्हें पसंद नहीं करते हैं, लेकिन उनकी अच्छाई धीरे-धीरे उन्हें सुंदर बना देती है। खुद की सोच पर विचार करें: समाज के बोलने से पहले खुद से पूछें कि क्या मैं दूसरों को उनके लुक्स के आधार पर जज करता हूं? अगर आप अपने सुंदर दिखने का लाभ उठाते हैं तो उन लोगों के अनुभवों को समझने की कोशिश करें, जो इससे वंचित है। ये बात समझना जरूरी है कि लोग आपको सिर्फ लुक्स से नहीं, बल्कि आपकी असली काबिलियत से पहचाने।