शंकराचार्य ने मोरारी बापू के व्यवहार को बताया रावणी प्रवृत्ति:कहा- अपने शास्त्र का प्रमाण दें मोरारी बापू, सूतक में दर्शन-पूजन और कथा करना शास्त्र के खिलाफ

प्रसिद्ध रामकथाकार मोरारी बापू एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार मामला धार्मिक परंपराओं से जुड़ा है। दरअसल, मोरारी बापू काशी पहुंचे है,जहां उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन किए और राम कथा का आयोजन भी किया। लेकिन ये सब उस समय हुआ जब वे सूतक काल में है। उनकी पत्नी के निधन के तीन दिन बाद ही उन्होंने ये धार्मिक गतिविधियां कीं, जिससे बनारस के संतों और श्रद्धालुओं में गहरी नाराजगी देखी गई। हालंकि सूतक में काशी विश्वनाथ के दर्शन करने का विरोध होने के बाद मोरारी बापू ने काशी के संतों और विद्वत समाज से माफी मांगी है। रविवार को रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में व्यासपीठ से मोरारी बापू ने सभी से क्षमा मांगी। उन्होंने कहा कि हम यहां आए। शिवजी के दर्शन करने गए। जल चढ़ाया और कथा गाने लगे। यह बात कई पूज्य चरणों और कई महापुरुषों को ठीक नहीं लगी। किसी को ठेस लगी हो तो मैं आप सबके प्रति क्षमा प्रार्थी हूं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि मेरे पास भी शास्त्र है दिखा सकता हूं। मोरारी बापू दिखाए अपना शास्त्र अब,शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी अपना बयान जारी किया है उन्होंने कहा काशी में अशास्त्रीय कार्य हो रहा है इस पर लोग सवाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें पता चला है मोरारी बापू काशी में अपनी पत्नी के निधन के तीन दिन बाद यहां कथा कहने आए हैं। उन्होंने बाबा विश्वनाथ का दर्शन पूजन और अभिषेक भी किया है। उन्होंने कहा कि यह सबसे बड़ा सवाल है कि सूतक में यह कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि हम मुरारी बापू से कहना चाहते हैं कि उनके पास है जो शास्त्र है वह लाय और बताएं कि कहां लिखा है कि सूतक में कथा और दर्शन पूजन किया जाता है। संबंधों से बड़ा शास्त्र होगा है,जो शास्त्र को नहीं मानेगा उसका विरोध होगा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि हमारे यहां संबंधों से बड़ा शास्त्र होता है और उसका निर्वाहन अगर कोई नहीं करेगा तो उसका विरोध हमें करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अगर वह अपने किए गए अपराध का पश्चाताप नहीं करता है तो यमराज किया उन्हें दंड मिलेगा ही। उन्होंने कहा कि सनातन का यही दृष्टिकोण है सूतक में जो कार्य नहीं करना चाहिए वह इस समय मोरारी बापू कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं एक बार पुनः मोरारी बापू से यह पूछना चाहता हूं कि वह किस लिए और किस अधिकार से कथा कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब पत्रकारों ने उनसे सवाल किया तो उन्होंने कहा कि हमारी परंपरा काफी पुरानी है। उन्होंने कहा कि हम वैष्णो साधु हैं और हम पर यह सूतक लागू नहीं होता है। समाधि करने से ही हमारा सब पूरा हो जाता है। माफ मांगकर गर्भ के दृष्टि से मोरारी बापू बोले मेरे पास भी शास्त्र है स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उनके माफी वाले वीडियो पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि मोरारी बापू ने माफी मांगने के साथ-साथ एक जुड़ने वाली बात करें जिसमें उन्होंने कहा कि हमारे बाबा कहते हैं कि हवन कुंड में जितना लकड़ी डालोगे आज उतनी लगेगी खुलासा मैं भी कर सकता हूं और गर्भ भरी दृष्टि से लोगों की तरफ देखकर कहते हैं कि हमारे पास भी शास्त्र है। इस बयान पर शंकाराचार्य ने कहा मोरारी बापू शब्दों के पंडित हैं तो उन्हें शब्दों का उपयोग करना चाहिए लेकिन वह दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो शास्त्र को मानता है उसे ठेस लगी है। उन्होंने कहा है कि अगर उनके जैसा प्रसिद्ध व्यक्ति मनमाना करेगा तो पूरा समाज मनमाना तरीके से कार्य करने लगेगा। उन्होंने कहा कि अगर सारा समाज मनमाना हो जाएगा तो विधि विधान और बनी हुई प्रक्रिया बेकार हो जाए। मोरारी बापू के आचरण को बताया रावणी प्रवृत्ति स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कहा किसी व्यक्ति को अपने मन का नहीं करना चाहिए। यह रावण की प्रवृत्ति थी वह अपने मन से सब कुछ करता था। उन्होंने कहा कि रावण था जो अपने ही मत्रों से राज्य करने लगा था। रावण अपने भुजों के बल पर विश्व को अपने वश में कर लिया और अपने अपने वाणी के बल पर सबको अपने वस में कर लिया है। उन्होंने कहा कि उनका कोई अधिकार नहीं है कि वह अपना मंत्र बनाकर और उसी के अनुसार कार्य करने लगे। यह रावणी प्रवृत्ति है। उन्होंने कहा कि मोरारी बापू का यह मनमानापन किसी भी प्रकार से स्वीकार नहीं किया जा सकता है।