स्विस बैंकों में भारतीयों का जमा पैसा 2024 में तीन गुना बढ़कर 3.5 अरब स्विस फ्रैंक यानी करीब 37,600 करोड़ रुपए हो गया है। स्विस नेशनल बैंक (SNB) के नए डेटा के मुताबिक ये 2021 के बाद सबसे ज्यादा है। SNB ने कल यानी 19 मई को ये आंकड़े जारी किए। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल है कि आखिर ये पैसा कहां से आया? क्या ये काला धन है? इसे सवाल-जवाब के जरिए आसान भाषा में समझते हैं… सवाल 1: स्विस बैंकों में भारतीयों का पैसा कितना बढ़ा है? जवाब: 2024 में स्विस बैंकों में भारतीयों का जमा पैसा 3.5 अरब स्विस फ्रैंक यानी करीब 37,600 करोड़ रुपए हो गया है। ये 2023 की तुलना में तीन गुना ज्यादा है, जब ये रकम सिर्फ 1.04 अरब स्विस फ्रैंक थी। ये 2021 के बाद का सबसे ऊंचा आंकड़ा है, जब ये 3.83 अरब स्विस फ्रैंक था। सवाल 2: ये पैसा आखिर किसका है और कहां से आया? जवाब: ये पैसा भारतीय व्यक्तियों और कंपनियों का है, जो स्विस बैंकों में जमा है। लेकिन ज्यादातर बढ़ोतरी बैंकों और वित्तीय संस्थानों के जरिए आए फंड्स की वजह से हुई है, न कि सीधे व्यक्तिगत खातों से। व्यक्तिगत ग्राहकों के खातों में जमा राशि सिर्फ 11% बढ़ी है, जो करीब 346 मिलियन स्विस फ्रैंक यानी, करीब 3,675 करोड़ रुपए है। यानी कुल रकम का सिर्फ दसवां हिस्सा ही व्यक्तिगत खातों से है। बाकी पैसा बैंकों, वित्तीय संस्थानों, बॉन्ड्स और सिक्योरिटीज जैसे रास्तों से आया है। सवाल 3: क्या ये सारा पैसा काला धन है? जवाब: नहीं, स्विस अधिकारियों और भारतीय सरकार ने साफ किया है कि स्विस बैंकों में जमा सारा पैसा काला धन नहीं माना जा सकता। ये आंकड़े स्विस नेशनल बैंक (SNB) के आधिकारिक रिकॉर्ड से हैं, जो बैंकों की देनदारियों (लाइबिलिटीज) को दिखाते हैं। इसमें वो पैसा शामिल नहीं है, जो भारतीय, NRI या अन्य लोग तीसरे देशों की कंपनियों के नाम पर जमा करते हैं। स्विस अधिकारी कहते हैं कि वो भारत के साथ टैक्स चोरी और धोखाधड़ी के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करते हैं। सवाल 4: तो फिर इतनी बड़ी रकम स्विस बैंकों में क्यों जमा हो रही है? जवाब: इसका बड़ा कारण है वित्तीय संस्थानों और स्थानीय शाखाओं के जरिए फंड्स का मूवमेंट। 2024 में इसमें भारी उछाल आया, खासकर बॉन्ड्स, सिक्योरिटीज के जरिए। 2023 में ये रकम 70% गिरकर चार साल के निचले स्तर पर थी, लेकिन अब इसमें रिकवरी हुई है। ये पैसा ज्यादातर कारोबारी या संस्थागत निवेश से जुड़ा हो सकता है, न कि सिर्फ व्यक्तिगत बचत से। सवाल 5: पहले भी ऐसी खबरें आई हैं, क्या ये नया ट्रेंड है? जवाब: नहीं, ये कोई नया ट्रेंड नहीं है। 2021 में भी स्विस बैंकों में भारतीयों का पैसा 14 साल के उच्चतम स्तर 3.83 अरब स्विस फ्रैंक पर था। लेकिन 2022 और 2023 में ये रकम काफी घटी थी। अब 2024 में फिर से उछाल देखने को मिला है। हालांकि, बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट (BIS) के आंकड़े, जो व्यक्तिगत जमा को बेहतर दिखाते हैं, बताते हैं कि 2024 में व्यक्तिगत जमा सिर्फ 6% बढ़कर 74.8 मिलियन डॉलर यानी करीब 650 करोड़ रुपए हुआ। ये 2007 के 2.3 अरब डॉलर के पीक से काफी कम है। सवाल 6: क्या सरकार इस पर कोई कदम उठा रही है? जवाब: हां, भारत और स्विटजरलैंड के बीच 2018 से वित्तीय जानकारी साझा करने का समझौता है। इसके तहत स्विस बैंकों में भारतीयों के खातों की जानकारी हर साल भारत को दी जाती है। 2019 और 2020 में भी ऐसी जानकारी साझा की गई थी। भारतीय सरकार समय-समय पर स्विस अधिकारियों से डिटेल्स मांगती रहती है, ताकि ये सुनिश्चित हो सके कि कोई टैक्स चोरी या अवैध फंड तो नहीं जमा हो रहा। सवाल 7: तो क्या ये चिंता की बात है? जवाब: जरूरी नहीं। स्विस बैंकों में पैसा जमा होना अपने आप में गलत नहीं है। ये वैध कारोबारी निवेश, विदेशी व्यापार या वित्तीय संस्थानों की गतिविधियों का हिस्सा हो सकता है। लेकिन अगर ये पैसा अवैध तरीके से जमा किया गया है, तो भारत-स्विटजरलैंड समझौते के तहत उसकी जांच हो सकती है। सरकार का कहना है कि वो टैक्स चोरी और काले धन के खिलाफ सख्ती से काम कर रही है। स्विस बैंक क्या है? स्विट्जरलैंड में मौजूद वे बैंक हैं, जो अपनी सख्त गोपनीयता (प्राइवेसी) और सिक्योरिटी के लिए जाने जाते हैं। इन बैंकों में लोग अपने पैसे इसलिए भी जामा करते हैं क्योंकि इनके खातों की जानकारी किसी को नहीं दी जाती अकाउंट होल्डर के देश और सरकार को भी नहीं। ये बैंक अपने कस्टमर डिटेल गुप्त रखते हैं और अकाउंट को केवल एक नंबर (कोड) से पहचाना जाता है, जिसे ‘नंबर्ड अकाउंट’ कहते हैं। इस वजह से ये बैंकों को दुनिया भर के अमीर लोग, कारोबारी, और कभी-कभी गलत काम करने वाले लोग भी अपने पैसे रखने के लिए चुनते हैं। 17वीं सदी में हुई थी स्विस बैंक की शुरुआत स्विस बैंक की शुरुआत 17वीं सदी में हुई थी, और 1713 में स्विट्जरलैंड में गोपनीयता के सख्त कानून बनाए गए। 1998 में यूनियन बैंक ऑफ स्विट्जरलैंड और स्विस बैंक कॉर्पोरेशन के मिलने से UBS बना, जिसे लोग आज ‘स्विस बैंक’ के नाम से जानते हैं। ये बैंक पैसे जमा करने के साथ-साथ इन्वेस्टमेंट और फाइनेंशियल सर्विसेज के लिए भी जाने जाते हैं।