दिल्ली में पहली बार क्लाउड सीडिंग होगी:DGCA ने मंजूरी दी, अगस्त से सितंबर के बीच 5 ट्रायल होंगे; ₹2.5 करोड़ खर्च होंगे

दिल्ली देश पहला राज्य बन गया है, जिसे प्रदूषण से निपटने के लिए क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम बारिश) के ट्रायल की परमिशन नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से मिल गई है। पर्यावरण मंत्री मंजींदर सिंह सिरसा ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह ट्रायल अगस्त के आखिरी सप्ताह से सितंबर के पहले हफ्ते के बीच किया जाएगा। कुल 5 ट्रायल किए जाएंगे ताकि यह समझा जा सके कि दिवाली और सितंबर के दौरान बढ़ने वाले स्मॉग को कम करने में यह तकनीक कितनी कारगर है। यह फैसला 7 मई को दिल्ली कैबिनेट की बैठक में लिया गया था। सरकार ने इस योजना को IIT कानपुर के सहयोग से लागू करने का फैसला किया है। सरकार के मुताबिक, एक बार कृत्रिम बारिश कराने की लागत करीब 66 लाख रुपये होगी, जबकि पूरे ऑपरेशन का खर्च 55 लाख रुपये रहेगा। कुल मिलाकर इस पूरे ट्रायल पर करीब 2 करोड़ 55 लाख रुपए का खर्च आएगा। दिल्ली के बाहरी इलाकों में ट्रायल होगा
ट्रायल दिल्ली के बाहरी इलाकों में किया जाएगा। इसके लिए अलीपुर, बवाना, रोहिणी, बुराड़ी, पावी सड़कपुर और कुंडली बॉर्डर के इलाकों को चुना गया है। क्लाउड सीडिंग 30 अगस्त से 10 सितंबर के बीच किया जाएगा। पहले यह ट्रायल जुलाई में होना था, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों के सुझाव पर इसे टाल दिया गया। दिल्ली की AQI ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच जाता है
दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अक्सर ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच जाता है। पहले भी कई योजनाएं बनाई गईं, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। अब सरकार उम्मीद कर रही है कि कृत्रिम बारिश से राहत मिल सकती है। ।IIT कानपुर के स्पेशल एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल होगा
ट्रायल की अनुमति DGCA ने दी है। इसके लिए ।IIT कानपुर का एक स्पेशल एयरक्राफ्ट ‘सेसना’ इस्तेमाल किया जाएगा, जो पूरी तरह से क्लाउड सीडिंग उपकरण से लैस है। इसमें अनुभवी पायलट उड़ान भरेंगे।