किताब- द माउंटेन इज यू (अंग्रेजी की बेस्टसेलर किताब ‘द माउंटेन इज यू’ का हिंदी अनुवाद) लेखक- ब्रियाना वीस्ट अनुवाद- यामिनी रामपल्लीवार प्रकाशक- मंजुल प्रकाशन मूल्य- 350 रुपए ‘जीवन में आपको आपसे अधिक कोई चीज नहीं रोक सकती।’ किताब की यह पहली लाइन ही आपको ठहर कर सोचने पर मजबूर करती है। हम जीवन में सफलता, असफलता, निराशा और खुशी सबकुछ बाहर ही खोजने के आदी होते हैं, लेकिन किताब आपको ये बात बहुत अच्छे से समझाती है कि ‘पहाड़ आप स्वयं हैं’ चढ़ गए तो जीत जाओगे। किताब नहीं, कोच है ‘द माउंटेन इज यू’ जैसे-जैसे किताब के पन्ने पलटते हैं, आपको ये एहसास होने लगता है कि आप किसी कमरे में बैठे हैं। जीवन का अच्छा-बुरा सामने एक स्क्रीन पर चल रहा है और कोई है जो आपसे सीधे बात कर रहा। मतलब ‘द माउंटेन इज यू’ किताब नहीं, कोच जैसे आपको हर अच्छे और बुरे से आपको वाकिफ कराती है। निराशा और हताशा के बीच ‘द माउंटेन इज यू’ एक टॉर्च जैसी है। किताब को पूरी तरह से जीवन के अनुभव, अलग-अलग पड़ाव और उनसे लड़ने के तरीकों पर लिखा गया है। यहां न सिर्फ परेशानी को अच्छे से समझाया गया है, उसके साथ ही ये भी बताया गया है कि इससे बाहर कैसे निकलना है। किताब ये भी बताती है कि सफलता कैसे मिलेगी और उसके लिए क्या-क्या बाधाएं रास्ते में आ रही हैं या आने वाली हैं। कई बार हम अपनी खराब आदत, गलत लाइफस्टाइल और सही दिशा-दशा का पता न होने के चलते गलत कदम उठा लेते हैं। ऐसे में यह किताब उन परिस्थितियों में आपको सही रास्ता चुनने में मदद करती है और कोई गलत कदम उठाने से रोकती है। पहाड़ है क्या ‘द माउंटेन इज यू’ किताब के नाम में बस पहाड़ है, असल में ये किताब आपसे बहुत छोटे-छोटे बदलाव करने की अपील करती है। जैसे अपने आसपास की चीजों को व्यवस्थित रखना, दूसरों से लगाव रखना, घमंड छोड़कर ईमानदारी से अपना काम करना। किताब में सीधे शब्दों में बताया गया है कि कैसे आपको पहले आत्मविनाश और उसकी वजहों को समझना होगा, तभी आप आत्मसुधार की तरफ बढ़ सकते हैं। हारना गलत नहीं है, गलत है हार को भूल जाना ‘द माउंटेन इज यू’ किताब पढ़कर आपको एक बात जरूर समझ आएगी कि दुनिया में परफेक्ट कोई भी नहीं है। जो चलता है, वो गिरता भी है। बहादुरी गिरने और उठकर फिर चलने में है। किताब में बताया गया है कि खराब स्थिति में होना बुरा नहीं है, गलत तब है जब हमारी बुरी आदतें एक पर एक जुड़ने लगती हैं। बुराई और बुरी स्थिति को जब हम स्वीकार कर लेते हैं, वहीं से रास्ता बदल जाता है। परफेक्शनिज्म छलावा है जब हम सबकुछ परफेक्ट करने के चक्कर में कुछ नहीं करते हैं। लगता है कि कुछ गलत हो जाएगा इसीलिए कदम ही नहीं उठाते। ये डर हमें जीवन के कई जरूरी कार्य करने से रोक देता है। इसीलिए काम को बहुत अच्छी तरह करने की चिंता न करें, बस करें। छोटे बदलाव बड़ा फर्क लाते हैं ‘द माउंटेन इज यू’ किताब में ब्रियाना वीस्ट लिखती हैं कि आप छोटे-छोटे कदम लेकर बड़ा लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। जैसे अगर आप रेगुलर एक्सरसाइज करना चाहते हैं तो अभी सिर्फ 10 मिनट के लिए करिए। अगर आप किताब पढ़ना चाहते हैं, तो अभी एक पेज से शुरुआत कर दीजिए। कहने का मतलब किसी भी लक्ष्य को हासिल करने का संकल्प लेना अच्छा है, लेकिन उससे भी ज्यादा खास है पहला कदम बढ़ाना। वो कदम कितना सफल होगा, कितना बड़ा होगा, ये मायने नहीं रखता है…बस कदम उठा है, यही बेहतर है। किताब के 10 बड़े सबक कहानी नहीं, फिर भी सबक कई सारे अक्सर हम जब किसी किताब को पढ़ते हैं तो नोट्स बनाते हैं या किसी खास बात को याद रखना चाहते हैं। लेकिन इस किताब की सबसे अच्छी बात ये है कि इसमें हर एक लाइन अपने आपमें संदेश लिए हुए है। किस्से नहीं हैं, लेकिन सबक बहुत सारे हैं। ये तय कर पाना मुश्किल हो जाता है कि क्या अंडरलाइन किया जाए। किताब आपके जीवन के उन पहुलओं को भी कुरेदने का काम करेगी, जिनका जिक्र शायद आप कभी खुद से भी न करते हों। ये किताब किसे पढ़नी चाहिए सबसे सीधा और आसान जवाब ये है कि अगर आप अपने मौजूदा हालात से हैरान-परेशान हैं। ऐसा लग रहा है कि कोई हो जो आपको सही राह दिखा सके, बता सके कि क्या गलत कर रहे हैं? क्या करना चाहिए? तो ये 205 पन्ने आप ही के लिए लिखे गए हैं। इसमें आपके करियर से लेकर व्यवहार, समाज, आपकी सोच और लगभग हर उस पहलू पर बात की गई है, जिनका सामना हम हर दिन करते रहते हैं। …… यह बुक रिव्यू भी पढ़ें बुक रिव्यू- दुनिया की हर परीक्षा में सफलता का राज:भटकाव से बचें और सोच बदलें, ‘लुक अराउंड’ में मिलेंगे जीवन के 7 गोल्डन रूल ‘लुक अराउंड’ मशहूर यूपीएससी इंटरव्यूअर, मेंटर और कम्युनिकेशन कोच विजेंद्र चौहान द्वारा लिखी गई एक मोटिवेशनल सेल्फ-हेल्प बुक है। इस किताब की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह सिर्फ प्रेरित नहीं करती, बल्कि मंजिल तक पहुंचने का रास्ता भी दिखाती है। पूरी खबर पढें