रायबरेली पुस्तक मेला 2025 में संजोली पांडे एवं शाम्भवी शुक्ला का हुआ कार्यक्रम

संजोली और शाम्भवी ने बिखेरी लोकगीतों की छटा

  • लोकगीत गायिका संजोली पांडे को दिया गया प्रथम उस्ताद अब्दुल रशीद खां स्मृति सम्मान
  • पुस्तक मेले में रात तक लोकगीतों पर झूमते रहे दर्शक और श्रोता

रायबरेली-उ.प्र.
रायबरेली में चल रहे पुस्तक मेले में चौथा दिन लोकगीतों के नाम रहा। अयोध्या की सुप्रसिद्ध लोक गायिका संजोली पांडे एवं प्रयागराज की शाम्भवी शुक्ला ने लोकगीत सुना कर समां बांध दिया। संजोली द्वारा गाये गये राम जन्म के सोहर और राम विवाह गीतों व लोकगीतों पर श्रोता झूमने को मजबूर हो गये और बीच-बीच में जोरदार तालियां गूंजती रहीं।
संजोली पांडेय ने अवधी एवं भोजपुरी भाषा के लोकगीतों को अपने स्वर देकर संरक्षित करने का अद्भुत कार्य कर रही हैं। अब तक वह 3000 लोकगीत गा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि उस्ताद अब्दुल रशीद खान साहब के नाम का सम्मान मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। उनके ऐसा महान शास्त्रीय गायक मिलना मुश्किल है।


रायबरेली में इप्टा के संस्थापक संतोष डे, लेखिका श्रीमती किरन शुक्ला एवं समाजसेवी श्रीमती दीपमाला तिवारी ने संजोली पांडे को उस्ताद अब्दुल रशीद खां सम्मान के रूप में स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र, सम्मान पत्र एवं बुके देकर सम्मानित किया। सेंट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ला एवं समाजसेवी अमर द्विवेदी ने प्रयागराज से आई शाम्भवी शुक्ला को सम्मानित किया।


सम्मान समारोह के बाद सरस्वती वंदना के साथ शुरू हुई लोकगीत संध्या में संजोली ने राम जन्म के समय का सोहर गाकर लोगों का दिल लूट लिया। उन्होंने विवाह संस्कार से जुड़े हुए कई गीत सुनाए। सास-ननद के मीठे-मीठे झगड़ों से जुड़े लोकगीतों ने श्रोताओं का मन मोह लिया। उन्होंने जैसे ही गाना-“रामहि राम हो रटन लागी जिभिया..जिभिया कहै हम जपब रामै राम.” , “एक अठन्नी हमरे जेठ की कमाई..चवन्नी लला के बधइया.” जैसे लोकगीत भी खूब सराहे गए। संजौली ने अंत में पुस्तक मेले पर आधारित गीत सुना कर लोगों को पढ़ने की ओर प्रेरित किया।


प्रयागराज से आई लोकगीत गायिका शांभवी शुक्ला ने भी कई लोकगीत सुना कर सभी का दिल जीता। जनसंचार में स्नातक कर चुकी शाम्भवी वर्तमान में दिल्ली से शोध कार्य कर रही हैं। संगीत से जुड़े कई विषयों पर उनकी पुस्तकें भी प्रकाशित हैं।
इसी क्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रंजना चौधरी भी मंगलवार को पुस्तक मेला स्थल पहुंची और प्रकाशकों द्वारा लगाए गए स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने कुछ पुस्तकें भी खरीदीं।

उन्होंने कहा कि शहर में पुस्तक मेले का आयोजन एक महत्वपूर्ण पहल है। इसकी निरंतरता के लिए वह भी सहयोग करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में बच्चों को मोबाइल से दूर करने का माध्यम पुस्तकें ही हो सकती हैं। उन्होंने आयोजकों के प्रति आभार भी व्यक्त किया। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति न्यास द्वारा आयोजित फिरोज गांधी कॉलेज परिसर में 9 दिन का पुस्तक मेला 1 नवंबर से शुरू हुआ था।


निफ्ट-रायबरेली की निदेशक डॉ जोनाली डी बाजपेई नए लोकगीत संध्या में शिरकत की। उन्होंने पुस्तक मेले के आयोजन की पहल की सराहना करते हुए कहा कि निफ्ट रायबरेली भी ऐसे आयोजनों में पूरी तरह से प्रतिभाग करेगा। निफ्ट के बच्चों को भी पुस्तक मेले के भ्रम के लिए भेज कर बच्चों को पुस्तकों से प्रेम करने की संस्कृति से जोड़ेंगे। उनके साथ संयुक्त निदेशक अमिताभ चौधरी एवं अकादमिक हेड प्रवीण श्रीवास्तव भी उपस्थित रहे।

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