अजा एकादशी आज:सुबह भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और शिव जी की करें पूजा, सूर्यास्त के बाद करें तुलसी की पूजा और परिक्रमा

आज (29 अगस्त) भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इसे अजा और जया एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस तिथि पर किए गए व्रत-उपवास से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, ऐसी मान्यता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, अजा एकादशी और गुरुवार के योग में भगवान विष्णु, महालक्ष्मी, श्रीकृष्ण के साथ ही शिव जी और देवगुरु बृहस्पति की पूजा करनी चाहिए। विष्णु जी और उनके अवतारों की पूजा में तुलसी खासतौर पर रखें। तुलसी को विष्णु प्रिया कहा गया है। इसके बिना भगवान भोग स्वीकार नहीं करते हैं। एकादशी की शाम करें तुलसी पूजा एकादशी की सुबह तुलसी को जल चढ़ाएं और सूर्यास्त के बाद तुलसी की पूजा जरूर करें। तुलसी को पूजनीय और पवित्र माना गया है। इसकी पूजा से घर में सुख-शांति बनी रहती है। तुलसी का प्रमुख गुण है शुद्धता। तुलसी अपने आस-पास के वातावरण शुद्ध बनाए रखती है। इसकी वजह से घर में सकारात्मकता बनी रहती है। जिन घरों में के आंगन में तुलसी होती है, वहां के कई वास्तु दोष दूर हो जाते हैं। तुलसी पूजन से भगवान विष्णु भी प्रसन्न होते हैं। एकादशी की सुबह तुलसी के खराब हो चुके पत्तों को हटाएं। तुलसी के आसपास साफ-सफाई और पवित्रता का ध्यान रखना चाहिए। सूर्यास्त के बाद तुलसी के बाद दीपक जलाना चाहिए। तुलसी पूजा में देवी को हल्दी, दूध, कुंकुम, चावल, भोग, चुनरी आदि पूजन सामर्गी अर्पित करें। दीपक जलाएं। कर्पूर जलाकर आरती करें। इस तिथि पर तुलसी के साथ शालिग्राम की भी पूजा करनी चाहिए। पूजा के बाद तुलसी की परिक्रमा करें। ध्यान रखें शाम को तुलसी को स्पर्श नहीं करना चाहिए। तुलसी से दूर रहकर पूजा करें। पूजा में तुलसी नामाष्टक का पाठ करना चाहिए। वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी। पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।। एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम। यः पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।। ऐसे करें गुरु ग्रह की पूजा ज्योतिष में गुरु ग्रह को गुरुवार का कारक माना जाता है। ये ग्रह धनु और मीन राशि का स्वामी है। इस ग्रह की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है। जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह से जुड़े दोष हैं, उन्हें हर गुरुवार शिव जी की विशेष पूजा करनी चाहिए। शिवलिंग पर केसर मिश्रित जल चढ़ाएं। बिल्व पत्र, धतूरा और आंकड़े के फूल के साथ पीले फूल भी चढ़ाएं। शिवलिंग पर चंदन का लेप करें। बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। चने की दाल और गुड़ चढ़ाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। एकादशी पर दान-पुण्य करना न भूलें एकादशी पर किसी गौ शाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें। गायों को हरी घास खिलाएं। किसी तालाब में मछलियों के लिए आटे की गोलियां बनाकर डालें। चींटियों की लिए शकर और आटा डालें। घर की छत पर पक्षियों के अनाज डालें। जरूरतमंद लोगों को धन, अनाज, कपड़े, जूते-चप्पल, छाता दान करें। छोटे बच्चों को खाना खिलाएं या मिठाई का दान करें।