धनतेरस से भाई दूज तक हर दिन की परंपरा खास:सेहत से लेकर परिवार में प्रेम बढ़ाता है पांच दिनों का दीपोत्सव

दीपावली पर पांच दिवसीय पूजन की परंपरा बनाई गई है। इस पंच दिवसीय उत्सव के पहले दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। जो आरोग्य और आयुष के देवता हैं। जिसमें लोगों को संदेश दिया गया कि सबसे पहले सेहत का ध्यान रखना जरूरी होता है। शरीर ठीक है तो ही अपना रूप निखार सकते हैं। रूप निखार कर कोई भी काम करते हैं तो आपका आत्म विश्वास मजबूत रहता है, इसलिए रूप चौदस का पर्व बनाया गया। सेहत को सुधारकर और रूप संवारकर अपने लक्ष्य पूरे करने में लगा देंगे तो लक्ष्मी जी प्रकट हो जाती हैं। यानी लक्ष्य में मन लग जाता है। लक्ष्मी पूजन से ये संदेश दिया गया है कि आप अपना धन अच्छे कामों में ही खर्च करें। दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजन से संदेश दिया है कि लक्ष्मी जी की कृपा से आपका व्यक्तित्व विराट पर्वत के समान बन गया हो। फिर आपके परिवार और दोस्तों पर कोई विपदा आ जाए तो अपनी छत्र छाया में लाकर उनकी मदद करें। आखिरी में भाई दूज पर्व मनाया जाता है। जिसमें बहन अपने भाइयों की पूजा करती है। इसमें ये संदेश दिया है कि आप पारिवारिक समरसता रखते हैं तो यमराज भी दूर रहते हैं, क्योंकि परिवार के आपसी प्रेम के कारण भगवान आप पर कृपा करते हैं और कोई भी आपका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है।