जानवरों से अच्छा दोस्त और कोई नहीं। यह बात वो लोग जरूर जानते हैं, जिनके पास घर में पालतू जानवर हैं। घर से ऑफिस जाते वक्त, काम से घर आते वक्त, घर में खाना खाते वक्त, गार्डन में घूमते वक्त और यहां तक कि सोते हुए भी एक वफादार साथी हमेशा हमारा इंतजार कर रहा होता है। इनके प्यार की तुलना किसी और चीज से नहीं की जा सकती है। पालतू जानवर का अनकंडीशनल लव यानी बिना कोई शर्त वाला प्यार एक इंसान के प्यार से कहीं ज्यादा है। घर आते ही पैरों से लिपट जाने वाला कुत्ता हो या रात में आपके साथ कंबल में दुबककर बैठने और कंबल के ऊपर कूदने वाली बिल्ली, इनकी मौजूदगी अनकंडीशनल लव का एहसास कराती है। लेकिन यह प्यार सिर्फ एहसास तक ही सीमित नहीं है। पालतू जानवर न सिर्फ हमारे अच्छे दोस्त होते हैं बल्कि ये हमारे तनाव को भी कम करते हैं। यहां तक की दिल की सेहत को भी बेहतर बना सकते हैं। यही मानना है भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु का, जो अपने मेंटल स्ट्रेस को दूर करने के लिए अपने पेट डॉग के साथ वक्त बिताती हैं। बता दें कि दो बार ओलिंपिक पदक विजेता रहीं भारतीय बैडमिंटन स्टार खिलाड़ी पीवी सिंधु ने पेरिस ओलंपिक में जीत के साथ आगाज किया। सिंधु ने महिला सिंगल्स के अपने अभियान के शुरुआती मैच में मालदीव की फातिमाथ अब्दुल रज्जाक को हराया। वहीं एस्टोनिया की क्रिस्टन कुब्बा को ग्रुप स्टेज में हराकर सिंधु ने लगातार दूसरी जीत दर्ज कर ली है। उन्होंने यह गेम केवल 33 मिनट जीत लिया। तो आज ‘रिलेशनशिप’ कॉलम में हम बात करेंगे कि कैसे पेट एनिमल्स हमारे मेंटल स्ट्रेस को कम करने में मददगार हैं और जानेंगे कि साइंस की इस बारे में क्या राय है। पालतू जानवरों के साथ रहने वाले लंबा जीते हैं अमेरिकन हार्ट एसोसएिशन जरनल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक पालतू जानवरों के साथ रहने से मोर्टेलिटी रेट 24% कम होता है। इस स्टडी के मुताबिक जानवरों के साथ से हमारे शरीर में स्ट्रेस हॉर्मोन,जिसे कोर्टिसोल कहते हैं, उसका स्तर को कम हो सकता है। साथ ही ये हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने में भी मददगार है। कई अध्ययनों में पाया गया कि जानवर अकेलेपन के एहसास को कम कर मूड को बेहतर बनाते हैं। बच्चों की शिक्षा और परवरिश में घरेलू पेट की भूमिका वर्ष 2008 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ एंड ह्यूमन डेवलपमेंट (NICHD) और वॉल्टमेन पेटकेयर साइंस इंस्टीट्यूट ने मिलकर एक स्टडी शुरू की। इसका मकसद यह समझना था कि जानवरों के साथ इंसानों का रिश्ता उनके मानिसक, शारीरिक स्वास्थ्य और उनके संपूर्ण वेलबीइंग को कैसे प्रभावित करता है। उन्होंने ऑटिज्म, अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) जैसे मेंटल हेल्थ कंडीशन से जूझ रहे बच्चों का अध्ययन किया और पाया कि पालतू जानवरों का साथ बच्चों की इस कंडीशन को बेहतर करने में मददगार था। चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट वसीली सुखोम्लिन्स्की अपनी किताब ‘ऑन एजूकेशन’ में लिखते हैं, “जानवरों के साथ बच्चों का बहुत अनोखा रिश्ता होता है। वे उनसे रिलेट करते हैं। बचपन से पालतू पशुओं के साथ बड़े हुए बच्चों में करुणा और इंपैथी ज्यादा होती है। साथ ही बच्चे अनकंडीशनल प्यार का सबक भी जानवरों से सीखते हैं।” बेजुबानों के साथ इंसानी रिश्तों का महत्व चेक यूनिवर्सिटी ऑफ लाइफ साइंसेज ने एक रिसर्च की, जिसमें यह जानने की कोशिश की गई कि पेट्स का ओनर की पर्सनैलिटी पर क्या असर पड़ता है। इस रिसर्च में 3 साल से लेकर 72 साल तक के 53 डॉग ओनर शामिल हुए। पार्टिसिपेंट्स के सामने 6 जार रखे गए। इनमें से किसी एक जार में वह रूमाल था, जिसमें उनके पालतू कुत्ते की स्मेल थी। बाकी में दूसरे कुत्तों की स्मेल वाले रूमाल थे। पार्टिसिपेंट्स को पहचानना था कि इनमें से कौन से रूमाल में उनके पेट डॉग की स्मेल है। रिसर्चर्स ने पाया कि लगभग तीन चौथाई यानी 75% डॉग ओनर्स ने अपने कुत्ते को उसकी गंध से पहचान लिया। इतना ही नहीं, वे अपने कुत्ते की गंध और बाकी कुत्तों की गंध में भी अंतर कर पा रहे थे। चाहे डॉग हो या कैट या फिर कोई और पालतू पशु, ह्यूमन पर्सनैलिटी पर उसका असर सिर्फ सूंघने की क्षमता तक सीमित नहीं है। वे हमारे वेलबीइंग से लेकर सेहत को भी प्रभावित कर सकते हैं। पालतू जानवर से इंसान को कई फायदे पालतू जानवर तनाव कम करते हैं। कई लोगों के जीवन में बहुत ज्यादा तनाव होता है। शोध से पता चलता है कि सिर्फ पालतू जानवर को सहलाने से आपका तनाव और रक्तचाप कम हो सकता है। इसके और भी कई फायदे हैं, नीचे ग्राफिक में देखें- मेंटल हेल्थ के लिए काम करने वाली संस्था हेल्प गाइड की एक रिपोर्ट के मुताबिक पेट ओनर्स में बीमार पड़कर डॉक्टर के पास पहुंचने की आशंका 30% तक कम हो जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्स के साथ खेलने और एक्टिविटी करने से मेंटल हेल्थ के साथ-साथ फिजिकल हेल्थ पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। पालतू जानवर रखने से हम रहते फिजिकली फिट एक स्टडी के मुताबिक पेट डॉग या कैट पालने वाला शख्स औसतन 30 मिनट एक्स्ट्रा वॉक करने लगता है। रिसर्च कहती है कि कुत्ता पालने वाले लोग दूसरों के मुकाबले एक साल में 7 किलो ज्यादा फैट बर्न कर पाते हैं। ज्यादातर पालतू जानवरों को भोजन, शौच, घूमने आदि की नियमित दिनचर्या की जरूरत होती है। उनके लिए जिम्मेदार होने से आपको प्रेरणा, उद्देश्य और सुबह उठने का कारण मिल सकता है। यह आपको फिजिकली फिट रख सकता है। पैदल चलने से आपके मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ आपके शारीरिक स्वास्थ्य को भी अच्छा बना रहता है। पालतू जानवर बढ़ाते सोशल नेटवर्क के अवसर पालतू जानवरों के जरिए आपका सोशल नेटवर्क बढ़ता है। जैसे आपको अपने पड़ोसियों को जानने में मदद मिल सकती है। जब आप अपने पेट्स को समुद्र तटों, गार्डन या पार्क में घुमाने ले जाते हैं तो आपकी मुलाकात कई लोगों से होती है। आप कई और पालतू जानवरों के मालिकों से मिलते हैं। रिसर्च सेंटर ‘ह्यूमन-एनिमल इंटरएक्शन’ की मानें तो पेट्स ओन करने वाले नए लोगों के साथ रिश्ते बनाने में पेट्स न रखने वालों की अपेक्षा आगे रहते हैं। उनका सोशल सर्किल ज्यादा बड़ा होता है। पालतू जानवर हार्ट हेल्थ को बेहतर बना सकते हैं पालतू जानवर रखने से आपके दिल की सेहत में सुधार हो सकता है। पालतू जानवर आपके रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल के स्तर और हृदय संबंधी समस्याओं के जोखिम को कम कर सकते हैं। पालतू जानवर बच्चों में एलर्जी, एक्जिमा दूर करने में मदद कर सकते शोध से पता चला है कि आपके बच्चे के जीवन के पहले साल के दौरान आपके घर में पालतू जानवर होने से अस्थमा, एक्जिमा और हे-फीवर जैसी पुरानी बीमारियों के विकसित होने की संभावना कम हो सकती है। आपका बच्चा जितना ज्यादा पालतू जानवरों के संपर्क में रहेगा, उतनी ही कम संभावना है कि उसे एलर्जी या अस्थमा होगा। घर में पेट्स हों तो बुजुर्गों का अल्जाइमर से बचाव अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया ने अपनी एक रिसर्च में पाया कि अगर अल्जाइमर पीड़ित किसी बुजुर्ग के पास पेट्स हों तो बीमारी के गंभीर रूप लेने की आशंका काफी कम हो जाती है। घर में कौन से पेट्स रख सकते हैं हर जानवर मन और शरीर की सेहत के लिए अच्छा है। आप अपने इंटरेस्ट और बजट के हिसाब से नीचे दिए ग्राफिक में से किसी का भी चुनाव कर सकते हैं। एक बात का ध्यान रखें कि आपके पास पालतू जानवर रखने के लिए पर्याप्त जगह हो।