संजय-रवीना की ‘घुड़चढ़ी’ से खुशाली संग डेब्यू कर रहे पार्थ:बोले- फिल्मों के लिए लोगों से मिलना बहुत बड़ा टास्क था, लोग सीरियसली नहीं लेते

बिनॉय गांधी के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘घुड़चढ़ी’ में 90 के दशक की मशहूर जोड़ी संजय दत्त और रवीना टंडन लंबे अरसे के बाद दर्शकों को साथ दिखाई देगी। वहीं, फिल्म में खुशाली कुमार और पार्थ समथान भी मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। यह फिल्म थिएटर में रिलीज ना होकर सीधे ओटीटी प्लेटफार्म जियो सिनेमा पर 9 अगस्त को रिलीज हो रही है। हाल ही में खुशाली कुमार और पार्थ समथान ने इस फिल्म को लेकर दैनिक भास्कर से बातचीत की। खुशाली कुमार ने इस फिल्म को अपने करियर की काफी अलग और मजेदार किरदार बताया। टीवी से फिल्मों में डेब्यू कर रहे पार्थ समथान ने बताया कि फिल्मों के लिए लोगों से मिलना ही बहुत बड़ा टास्क था। बिना मिले ही सोच लेते हैं कि टीवी के कलाकारों के साथ काम नहीं करना है। राइटर की फैमिली में ऐसी घटना घट चुकी है फिल्म ‘घुड़चढ़ी’ में दिखाया गया है कि बाप- बेटे में से घोड़ी पर कौन चढ़ेगा? क्योंकि बाप- बेटे दोनों के लिए शादी के रिश्ते देखे जा रहे हैं। टीवी से फिल्मों में डेब्यू कर रहे पार्थ समथान ने कहा- फिल्म की कहानी जब हमने सुनी तो हंस-हंस के लोटपोट हो गए थे। हमारे फिल्म राइटर दीपक कपूर के फैमिली में ऐसी घटना घट चुकी है। इसमें में चिराग की भूमिका निभा रहा हूं। समझ लीजिए राइटर खुद ही चिराग हैं। देविका का किरदार बिल्कुल मेरे जैसी फिल्म में देविका की भूमिका निभा रही खुशाली कुमार ने कहा- मेरी पहले की फिल्मों से काफी अलग और मजेदार किरदार है। मैं हमेशा से कॉमेडी करना चाह रही थी। मुझे बताया गया था कि देविका का किरदार बिल्कुल मेरे जैसा ही है। डायरेक्टर ने बताया था कि इस फिल्म के लिए आप जैसे हो वैसे ही रहना है। मुझे यह फिल्म करने बहुत मजा आया। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें संजय सर और रवीना मैम के साथ काम करने का मौका मिला है। उनके साथ काम करने का मतलब सपने सच होने जैसा है। संजय सर को बस देखते ही रह गई खुशाली कुमार ने संजय दत्त से पहली मुलाकात का किस्सा शेयर करते हुए कहा- मेरे लिए फैन मोमेंट्स था। पहली बार संजय सर जब फिल्म के सेट पर आए तो पिन ड्रॉप साइलेंट हो गया था। उनकी एनर्जी और औरा ही इस तरह से है कि बस आप उन्हें देखते रहें। उनका व्यक्तित्व ऐसा है कि उनको सिर्फ देखकर ही आप इन्जॉय करने लगते हो। लगा कि मुन्ना भाई सेट पर आ गए पार्थ समथान ने कहा- मैंने तो कभी सोचा ही नहीं था कि पहली ही फिल्म में संजय सर के साथ काम करने का मौका मिलेगा। वह भी उनके बेटे का किरदार निभाने का मौका मिलेगा। पहली बार जब सामने से उन्हें सेट पर आते देखा तो लगा कि मुन्ना भाई भाई आ रहे हैं। कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से लड़कर आए हैं। वो अपने अपने कैंसर के एक्स- रे दिखाते थे और बताते थे कि उस घड़ी में किस तरह से संयम से काम लिया। रवीना टंडन को मां कहना आसान नहीं था इस फिल्म में रवीना टंडन ने खुशाली कुमार की मां का किरदार निभाया है। खुशाली कुमार ने कहा- रवीना मैम के साथ काम करने का बहुत ही मजेदार अनुभव रहा है। वो बहुत ही स्वीट और हॉट हैं। इसलिए उनको मां कहना आसान नहीं था। एक सीन में उन्होंने कहा भी कि खुशाली को ममता भरी निगाहों से देख रही हूं,लेकिन वो वैसे नहीं देख रही है। वो बहुत ही अच्छी कलाकार हैं। उनके साथ जो भी सीन्स किए, बहुत मजा आया। बिना मिले ही लोग सोच लेते हैं कि टीवी कलाकारों के साथ काम नहीं करना है पार्थ ने कहा- मैं तो टीवी से आया हूं फिल्मों के लिए लोगों से मिलना ही बहुत बड़ा टास्क था। फिल्मवालों का टीवी के कलाकारों के प्रति शुरू से ही अलग नजरिया रहा है। ऐसे कई डायरेक्टर हैं जो मीटिंग से पहले ही सोच लेते हैं कि टीवी के कलाकारों के साथ काम नहीं करना है। यह बहुत ही दुर्भाग्य की बात है। मैं चाहता हूं कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले एक बार मिल तो लें। डायरेक्टर बिनॉय गांधी के मन में भी शंका थी बिनॉय गांधी के मन में भी पहले शंका थी। लेकिन इस फिल्म के लिए जब पहली बार मीटिंग हुई तो उन्हें लगा कि फिल्म कर सकता है। मैंने उनको अपने कुछ शोरील भी दिखाए थे। उससे बहुत इंप्रेस हुए। खुशाली के साथ मैंने म्यूजिक वीडियो किए थे। जब खुशाली फिल्म के लिए पहले फाइनल हो गई तो हीरो ढूंढा जा रहा था कि कैसा होगा? डायरेक्टर ने ही हमारा म्यूजिक वीडियो ‘धोखा” देखा था, उन्हें लगा कि फिल्म में इनकी जोड़ी अच्छी हो सकती है। थिएटर में तभी फिल्में देखता जब लगता है कि बड़े स्टार कास्ट के साथ बढ़िया फिल्म होगी ‘घुड़चढ़ी’ थिएटर में रिलीज ना होकर ओटीटी पर रिलीज हो रही है। पार्थ ने कहा- आज की जनरेशन तो ओटीटी पर ही फिल्में देखना पसंद करती है। कोविड ने हमारे फोन पर इतने सारे ऑप्शन ला दिए हैं कि अब हमें बाहर जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती है। मुझे भी जब तक नहीं लगता कि बहुत बढ़िया और बड़े स्टारकास्ट की फिल्म है, तब तक थिएटर में नहीं जाता हूं। मुझे लगता कि सैटलाइट और ओटीटी पर तो फिल्म आ ही जाएगी। वहां देख लूंगा। हम थोड़े लेजी भी हो गए हैं। लेकिन हां, थिएटर में फिल्म देखने का अपना एक अलग आनंद तो होता ही है।