सावन महीना 19 अगस्त तक:शिवलिंग पर बिल्व पत्र के साथ ही शमी के पत्ते भी जरूर चढ़ाएं, जानिए कब नहीं तोड़ना चाहिए बिल्व पत्र

अभी शिव जी का प्रिय सावन चल रहा है और ये महीना 19 अगस्त तक रहेगा। बिल्व पत्र के बिना शिव पूजा पूरी नहीं होती है, लेकिन बिल्व के साथ ही शमी के पत्ते भी जरूर चढ़ाना चाहिए। शिवलिंग पर शमी के पत्ते चढ़ाने से कुंडली के शनि दोषों का असर खत्म होता है। ऐसी मान्यता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, बिल्व पत्र कई दिनों तक बासी नहीं माना जाता है। शिव पुराण में लिखा है कि एक ही बिल्व पत्र को बार-बार धोकर फिर से पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है। अभी बारिश के दिन हैं और बिल्व पत्र आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन अगर बिल्व पत्र नहीं मिल रहे हैं तो शिवलिंग पर चढ़े हुए बिल्व पत्र को ही धोकर फिर से भगवान को चढ़ा सकते हैं। बिल्व पत्र के साथ ही शिवलिंग पर शमी के पत्ते भी जरूर चढ़ाना चाहिए। शमी के पत्ते शनिदेव, गणेश जी के साथ ही शिव जी को भी चढ़ाने की परंपरा है। जानिए बिल्व पत्र और शमी के पत्ते से जुड़ी खास बातें बिल्व पत्र अष्टमी, चतुर्दशी, अमावस्या तिथि और रविवार को नहीं तोड़ना चाहिए। इन तिथियों पर बाजार से खरीदकर या शिवलिंग पर चढ़े हुए बिल्व पत्र को धोकर फिर से भगवान को चढ़ा सकते हैं। अभी बारिश का समय है और इन दिनों में लगाए गए पौधे पनपने की काफी अधिक संभावनाएं रहती हैं। इसलिए किसी सार्वजनिक पार्क में या किसी मंदिर में बिल्व का पौधा लगा सकते हैं। आयुर्वेद के मुताबिक, बिल्व के पेड़ में लगने वाला फल बहुत पौष्टिक होता है और इसके नियमित सेवन से हम कई बीमारियों से बचे रहते हैं। इस फल का कई दवाइयों में उपयोग किया जाता है। बिल्व वृक्ष को शिव जी का ही एक स्वरूप माना गया है। इसका एक नाम श्रीवृक्ष भी है। श्री महालक्ष्मी का एक नाम है। इस वृक्ष की जड़ों में देवी गिरिजा, तने में देवी महेश्वरी, शाखाओं में देवी दक्षायनी, पत्तियों में देवी पार्वती, फूलों में मां गौरी और फलों में देवी कात्यायनी वास करतीं हैं। पत्तियों में देवी पार्वती का वास होने से शिवलिंग पर इसे खासतौर पर चढ़ाया जाता है। शमी का वृक्ष पूजनीय और पवित्र है। घर में शमी का वृक्ष लगाने से शनि के सभी दोषों से मुक्ति मिल सकती है। इसके साथ ही शमी के पत्ते शिवलिंग पर चढ़ाने से सौभाग्य की कामना पूरी हो सकती है। शिव मंदिर जाएं और तांबे के लोटे में गंगाजल या पवित्र जल में गंगाजल, चावल, सफेद चंदन मिलाकर शिवलिंग पर ऊँ नम: शिवाय मंत्र बोलते हुए अर्पित करें। बिल्वपत्र, जनेऊ और शमी के पत्ते भी चढ़ाएं। घर में बिल्व और शमी वृक्ष के पौधे लगाए जा सकते हैं। माना जाता है कि इन वृक्षों की वजह से घर के कई वास्तु दोष शांत होते हैं। घर के आसपास सकारात्मकता बनी रहती है।