सेहतनामा- जब अमिताभ बच्चन का चलना-बोलना मुश्किल हुआ:क्या है रेयर बीमारी मायस्थेनिया ग्रेविस, जानें इसके लक्षण और बचाव

सदी के महानायक अमिताभ बच्चन साल 2023 में ‘कौन बनेगा करोड़पति’ शो का 15वां सीजन होस्ट कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने दर्शकों के साथ अपने जीवन का एक स्याह हिस्सा साझा किया। उनकी जिंदगी में एक ऐसा समय आया था, जब वह अपनी शर्ट के बटन नहीं लगा सकते थे, अपने हाथ से पानी नहीं पी सकते थे। यहां तक कि उनके लिए अपने आप पलकें झपकाना तक मुश्किल हो रहा था। उनकी यह हालत हुई थी एक रेयर न्यूरो-मस्कुलर डिसऑर्डर के कारण। वह मायस्थेनिया ग्रेविस से पीड़ित थे। इस बीमारी से प्रभावित शख्स की नर्व्स और मांसपेशियों के बीच संचार टूट जाता है। इससे मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं और यह स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जाती है। चूंकि हमारा नर्वस सिस्टम सिर और चेहरे के नजदीक है तो इसका असर भी यहीं से शुरू होता है। सबसे पहले डबल विजन की समस्या होती है और पलकें झपकाना मुश्किल होने लगता है। फिर आवाज लड़खड़ाने लगती है, कुछ भी निगलना मुश्किल हो जाता है। यह बीमारी जीवित इंसान को मृत सा बना देती है। आज ‘सेहतनामा’ में बात करेंगे न्यूरो-मस्कुलर डिसऑर्डर मायस्थेनिया ग्रेविस के बारे में। साथ ही जानेंगे कि- अमिताभ बच्चन को लगा कि उनका फिल्मी करियर खत्म हो गया बिग-बी को जब पता चला कि वह इस रेयर बीमारी मायस्थेनिया ग्रेविस से जूझ रहे हैं और इसमें इंसान का अपनी मसल्स पर जोर खत्म होता जाता है तो वह डर गए थे। मायस्थेनिया ग्रेविस क्या है यह एक ऑटोइम्यून कंडीशन है, जिसमें स्केलेटल मसल्स कमजोर हो जाती हैं। स्केलेटल मसल्स का मतलब, वे मांसपेशियां जो हमारी हड्डियों से जुड़ी होती हैं और हमें चलने-फिरने, उठने-बैठने में मदद करती हैं। मायस्थेनिया ग्रेविस आमतौर पर सबसे पहले आंख, चेहरे, गर्दन, बाहों और पैरों की मांसपेशियों को प्रभावित करता है। यह हमारी इन क्षमताओं को प्रभावित कर सकता है- अगर इस कंडीशन में फिजिकल एक्टिविटी की जाए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है, जबकि आराम करने पर स्थिति में सुधार होता है। यह लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है, जिसमें हमारी नर्व्स और मांसपेशियों के बीच का जंक्शन प्रभावित हो जाता है। इसका कोई सटीक इलाज नहीं है, लेकिन प्रभावी ट्रीटमेंट से लक्षणों को कम किया जा सकता है। इस रेयर बीमारी के क्या लक्षण हैं इसके शुरुआती लक्षण अचानक सामने आते हैं। अगर कोई मेहनत का काम कर रहा है तो आमतौर पर मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इसके बाद जैसे ही आराम करते हैं तो मांसपेशियों की ताकत वापस आ जाती है। मांसपेशियों की कमजोरी की तीव्रता अक्सर दिन-प्रतिदिन बदलती रहती है। इससे प्रभावित ज्यादातर लोग सुबह यानी दिन की शुरुआत में मजबूत और दिन के आखिर तक थकने के कारण बहुत कमजोर महसूस करते हैं। आइए ग्राफिक में देखते हैं कि इसका किस अंग पर क्या प्रभाव पड़ता है। यह बीमारी कैसे होती है जब हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) गलती से खुद पर हमला कर देती है तो यह ऑटोइम्यून कंडीशन बन जाती है। हालांकि शोधकर्ता अभी तक इस बात का पता नहीं लगा पाए हैं कि ऐसा क्यों होता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, जब हमारी थाइमस ग्रंथि में कुछ प्रतिरक्षा प्रणाली कोशिकाओं को यह पहचानने में परेशानी होने लगती है कि शरीर को किन चीजों से खतरा है तो यह स्थिति पैदा होती है। कई बार आनुवांशिक परिवर्तन के कारण यह समस्या जन्मजात भी हो सकती है। मायस्थेनिया ग्रेविस के रिस्क फैक्टर्स क्या हैं यह बीमारी अक्सर महिलाओं को 40 वर्ष की उम्र के करीब और पुरुषों को 60 वर्ष की उम्र के बाद प्रभावित करती है। हलांकि यह कंडीशन किसी भी उम्र में किसी के भी साथ बन सकती है। आइए ग्राफिक में देखते हैं कि इससे किसे अधिक खतरा है। इसका इलाज क्या है रेयर न्यूरो-मस्कुलर डिसऑर्डर मायस्थेनिया ग्रेविस का फिलहाल कोई सटीक इलाज नहीं उपलब्ध है। हालांकि इसके लक्षणों को कम करने के लिए कुछ मैनेजमेंट किए जा सकते हैं, जैसे- इसके अलावा लाइफस्टाइल में कुछ जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं। कुछ दवाएं और सप्लीमेंट्स इस रेयर बीमारी के लक्षणों को और बदतर बना सकती हैं। इसलिए कोई भी नई दवा लेने से पहले डॉक्टरी सलाह जरूरी है। अपने मन से कोई दवा न लें।