स्वामी विवेकानंद से कई ऐसे प्रसंग हैं, जो हमें जीवन में सही रास्ता चुनने में मदद करते हैं। स्वामी विवेकानंद ने प्रारंभिक जीवन में कई कठिनाइयों का सामना किया, इसके बावजूद वे सच्ची भक्ति करते रहे और अपने अध्यात्म के लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे। स्वामी विवेकानंद के बचपन का नाम नरेंद्र था। नरेंद्र का बचपन कठिनाइयों से भरा था। पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उनकी मां ने जैसे-तैसे घर चलाने का प्रयास किया, लेकिन कई बार खाने की व्यवस्था भी करना कठिन हो जाता था। बालक नरेंद्र को कई बार भूखे पेट रहना पड़ता था। वे अपनी मां से ये कहकर घर से बाहर निकल जाते थे कि उन्हें कहीं और भोजन के लिए जाना है, लेकिन असल में वे खाली पेट ही गलियों में घूमते रहते थे। जब विवेकानंद को मिला परमहंस जी का सान्निध्य स्वामी विवेकानंद की सीख भगवान से भौतिक सुख-सुविधाएं मांगने के बजाय आत्मविश्वास, प्रसन्नता और ज्ञान मांगना चाहिए। सुख-सुविधी की चीजें तो हम अपनी मेहनत से प्राप्त कर सकते हैं। सच्ची शांति और आनंद भगवान की कृपा से ही मिलता है।