भाद्रपद मास की अमावस्या को कुशग्रहणी अमावस्या कहते हैं। इस साल ये अमावस्या तिथियों की घट-बढ़ की वजह से दो (2 और 3 सितंबर) दिन रहेगी। पुराने समय में पूजा-पाठ करने वाले लोग इसी तिथि पर पूरे साल के लिए कुशा घास इकट्ठा करते थे, क्योंकि पूजन में इस घास का विशेष महत्व है। कुशा के बिना पूजा-पाठ और पितरों के लिए किए गए धूप-ध्यान अधूरे ही माने जाते हैं।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा कहते हैं कि सोमवार की अमावस्या को सोमवती और मंगलवार की अमावस्या को भौमवती कहते हैं। इस बार 2 सितंबर को सोमवती अमावस्या और 3 सितंबर को भौमवती अमवस्या रहेगी। जानिए इस तिथि पर कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं…
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