पडरौना-कुशीनगर।
निराला शब्द संवाद मंच पडरौना कुशीनगर और हिन्दी साहित्य भारती गोरक्ष प्रान्त गोरखपुर के संयुक्त तत्वावधान में उदित नारायण इण्टरमीडिएट कालेज के सभागार में आयोजित वार्षिक समारोह में जहां देश-विदेश के साहित्यकार एवं पत्रकार सम्मानित किये गये वहीं हिन्दी साहित्य भारती गोरक्ष प्रान्त गोरखपुर से सम्बन्धित पदाधिकारियों के मनोनयन की घोषणा भी की गई। सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि माता-पिता सेवा सम्मान से तदनुरूप व्यक्तित्व को सम्मानित कर समाज को एक सन्देश देने का कार्य किया गया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन तथा वैदिक मन्त्रों से मां वीणा वादिनी के चित्र पर पुष्पार्जन से हुआ। गणेश वन्दना सुप्रसिद्ध गायिका अनिता मिश्रा, सरस्वती वन्दना डॉ गीता पाण्डेय अपराजिता व स्वागत गीत माधुरी मधु द्वारा प्रस्तुत किया गया। मंच के संरक्षक डॉ सुधाकर तिवारी, अध्यक्ष डॉ ओमप्रकाश द्विवेदी ओम, मदन मोहन पाण्डेय, डॉ संजय मिश्र, ब्रजेश कुमार त्रिपाठी, भूपेन्द्र राय गंवार, राणा प्रताप सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया।
हिन्दी साहित्य भारती के प्रदेश महासचिव डॉ अमर नाथ द्विवेदी ने अपने सम्बोधन में कहा कि साहित्य साधना समाज सेवा का अंग है। इससे आत्मचिंतन व आत्मबोध के साथ- साथ सामाजिक परिवेश का सजीव चित्रण होता है। हिन्दी सेवा ही राष्ट्र सेवा है।
बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय कुशीनगर के हिन्दी विभाग के प्रोफेसर डॉ गौरव तिवारी ने जहां इस कार्यक्रम की सराहना की वहीं ऐसे कार्यक्रमों को आयोजित कर साहित्य के प्रति समाज को जागरूक करने की आवश्यकता है। उन्होंने महर्षि बाल्मीकि का उदाहरण प्रस्तुत कर कहा कि कविता घटना क्रम की उत्पत्ति होती है। उन्होंने निराला से सम्बन्धित कई उद्धरण प्रस्तुत किये साथ ही उपस्थित साहित्यकारो से सीख लेने पर बल दिया। उन्होंने साहित्य के विविध काल के उद्धरणों से साहित्यकारों के लेखन प्रवृत्ति को प्रवृत करने पर बल दिया।
हिन्दी साहित्य भारती के प्रदेश अध्यक्ष प्रहलाद वाजपेई ने वर्तमान परिवेश में हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान की अवधारणा पर बल दिया। हिन्दी को राष्ट्रभाषा गौरव हेतु सतत प्रयास पर बल दिया।
मुख्य अतिथि जयप्रकाश विश्वविद्यालय छपरा के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ वैद्यनाथ मिश्र ने वैदिक मन्त्रों से वक्तव्य प्रारंभ कर भोजपुरी को कैसे संस्कृत भाषा में अनुवाद कर सस्वर पढ़ा जाता या गाया जाता है। उदाहरण के साथ प्रस्तुत किया। उपस्थित समूह को खूब भाया। उन्होंने मातृभाषा के बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों को साहित्यिक आचरण के साथ दैनिक आचरण को तदनुरूप अनुचरित करना चाहिए। उन्होंने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि दिवंगत साहित्यकारों को जीवन्त रूप प्रदान करने के लिए उनके नाम दिया जाने वाला सम्मान समाज को एक दिशा देगा। ऐसा वृहद कार्यक्रम आयोजित कर आयोजक डॉ सुधाकर तिवारी, डॉ ओमप्रकाश द्विवेदी ओम व आयोजन मण्डल सुन्दर व चर्चित कार्य किया है।

विद्याधर्म से अलंकृत डॉ विद्यासागर उपाध्याय ने संस्कृत निष्ठ व मन को छू लेने वाले शब्दों से उपस्थित समूह को सम्बोधित कर आचरण के प्रति सचेष्ट किया।
समारोह को डॉ प्रेम चन्द्र सिंह, जीतेन्द्र पाण्डेय जौहर, सम्पादक डॉ शिवेश्वर पाण्डेय ने भी सम्बोधित किया। नगर पालिका पडरौना के अध्यक्ष विनय जायसवाल ने उपस्थित साहित्यकारों को अंग वस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। नेपाल से विजय किशोर पाण्डेय को निराला शिखर सम्मान, डॉ गीता पाण्डेय अपराजिता को निराला श्री, अनिता मिश्रा को मोती बी ए, डॉ दुर्गा पाण्डेय को गोपी कृष्ण चतुर्वेदी बाबू सम्मान, अशोक कुमार शर्मा को अछयवर दीक्षित सम्मान, श्रीमती प्रीति पाण्डेय को माधव मधुकर सम्मान, दिनेश गोरखपुरी को डा लल्लन मिश्र सम्मान, नन्दलाल मणि त्रिपाठी को डा धर्मरक्षित सम्मान, श्रीमती प्रार्थना राय को गोरख पाण्डेय सम्मान, श्रीमती क्षमा श्रीवास्तव को विश्वनाथ पाण्डेय राहगीर सम्मान, डॉ सुधीर श्रीवास्तव को जनार्दन पांडेय अनुरागी सम्मान, सिद्धी नाथ शर्मा वाराणसी को योगेन्द्र नारायण चतुर्वेदी सम्मान, पत्रकार राज सिंह को वंश बहादुर तिवारी सम्मान, आकाश महेशपुरी को भगवती प्रसाद खेतान सम्मान, निराला श्री सम्मान से सोमदत्त ओझा सोमेश, देवेन्द्र बंगाली सम्मान डॉ सुभाष यादव को,भागवत पाण्डेय देहाती सम्मान डॉ मधुसूदन पाण्डेय को, रायबरेली उत्तरप्रदेश से पधारे हुए डॉ शिवनाथ सिंह शिव, शिवकुमार सिंह, डॉ इन्द्र बहादुर भदौरिया, कवि एवं मीडिया प्रभारी/पत्रकार डॉ राम लखन वर्मा को निराला काव्य श्री सम्मान, साथ ही इन्द्रजीत तिवारी निर्भीक गाजीपुर, अखण्ड प्रताप सिंह गहमरी,डॉ विदुषी बहाना, डॉ वीरेंद्र सिंह कुसुमाकर, डॉ के पी कुलश्रेष्ठ दिल्ली को भी निराला काव्य श्री सम्मान के अलावा श्रीमती रीतू पाण्डेय त्रिधा प्रयागराज को मनोहरा देवी सम्मान से, हिन्दी साहित्य भारती सेवा सम्मान से शैलेश कुमार उपाध्याय, आदित्य श्रीवास्तव, फिरोज अश्क, वन्दना सूर्यवंशी, वन्दना मिश्रा, बलराम राय, ईश्वर चन्द्र विद्यावाचस्पति, सौदागर सिंह, जीज्ञासु, डॉ मोहन पाण्डेय, डॉ रामानुज द्विवेदी सहित कई साहित्यकार सम्मानित किये गये। श्रवण कुमार सम्मान से शैलेन्द्र दत्त शुक्ल, कुलादेवी मातृसेवा सम्मान से श्रीमती लीलावती देवी व राजमति देवी मातृसेवा सम्मान से पार्वती देवी सम्मानित की गई।
अध्यक्षता डॉ इन्द्र बहादुर सिंह भदौरिया व संचालन डॉ ओमप्रकाश द्विवेदी ने किया। सम्मान समारोह को सफल बनाने में डॉ सुधाकर तिवारी, मदन मोहन पाण्डेय, डॉ कालिंदी तिवारी, डॉ संजय मिश्र, ब्रजेश कुमार त्रिपाठी,भूपेन्द्र राय गंवार, सुधीर शाही, राणा प्रताप सिंह, सुमन्त दूबे, दुर्गा दयाल, हरिशंकर चौबे, मनोज मिश्रा, शैलेश उपाध्याय,आदित्य गुप्ता का सहयोग सराहनीय रहा।
इस अवसर पर डॉ ओमप्रकाश द्विवेदी ओम की लिखित विविधा, स्मृति, फायकु पर आधारित डॉ शिवेश्वर पाण्डेय की पुस्तक, मऊ की डॉ श्रीमती आराधिका राय की लिखित बच्चों के लिए कहानियां , बंगाल के विप्लव दास की लिखित किताब ‘भारत क्यो निशाने’ पर का विमोचन हुआ।
इस अवसर पर कुशीनगर, देवरिया,गोरखपुर, बिहार, प्रयागराज, रायबरेली, वाराणसी, दिल्ली लखनऊ से आये साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की।