आज (31 अक्टूबर) दीपावली है और आज रात देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाएगी। लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर के बाहर दीपक जलाए जाते हैं। पौराणिक मान्यता है कि दीपावली की रात लक्ष्मी जी की बड़ी बहन अलक्ष्मी के लिए दीपक जलाना चाहिए। अलक्ष्मी दरिद्रता की देवी हैं, इसलिए दरिद्रता को घर से दूर रखने के लिए एक दीपक अलक्ष्मी के नाम से जलाना चाहिए। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, शास्त्रों में अलक्ष्मी से जुड़ी कई कथाएं बताई गई हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय लक्ष्मी से पहली उनकी बड़ी बहन अलक्ष्मी प्रकट हुई थीं। अलक्ष्मी दरिद्रता की देवी हैं, इसलिए उन्होंने आसुरी शक्तियों को अपनाया था। अलक्ष्मी के बाद समुद्र से महालक्ष्मी प्रकट हुई थीं, उन्होंने भगवान विष्णु को चुना था। देवी लक्ष्मी धन-धान्य की देवी हैं और अलक्ष्मी दरिद्रता की देवी हैं। अलक्ष्मी का विवाह उद्दालक नाम के मुनि से हुआ था। जब उद्दालक मुनि देवी अलक्ष्मी को लेकर अपने आश्रम गए तो अलक्ष्मी ने उस आश्रम में प्रवेश करने से मना कर दिया था। मुनि ने आश्रम में प्रवेश न करने की वजह पूछी तो अलक्ष्मी ने बताया कि मैं सिर्फ उन घरों में जाती हूं, जो घर गंदे रहते हैं, जहां के लोग हर समय लड़ाई-झगड़ा करते हैं, जहां लोग गंदे कपड़े पहनते हैं। अलक्ष्मी आगे कहती हैं कि जो लोग अधर्म यानी गलत काम करते हैं, मैं उनके घर में जाती हैं। जिन घरों में हमेशा साफ-सफाई रहती है, यहां के लोग सुबह जल्दी उठते हैं, रोज पूजा-अर्चना करते हैं, साफ कपड़े पहनते हैं, ऐसी जगहों पर मैं प्रवेश नहीं कर पाती हूं। ऐसे घरों पर मेरी बहन देवी लक्ष्मी का अधिकार है। कथा का संदेश अलक्ष्मी की कथा का संदेश ये है कि देवी लक्ष्मी की पूजा करने के साथ ही हमें अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव करने चाहिए। घर में साफ-सफाई रखें, अधर्म से बचें, अच्छे कपड़े पहनें, सुबह जल्दी उठें, तब हमें देवी लक्ष्मी की कृपा मिल सकती है। अगर हम इन बातों का ध्यान नहीं रखते हैं और अधर्म करते हैं, आलस करते हैं, काम नहीं करते हैं, पूजा-पाठ नहीं करते हैं तो हमारे घर में अलक्ष्मी प्रवेश करती हैं और घर में दरिद्रता, परेशानियां आ जाती हैं।