महाराष्ट्र में विधान परिषद (MLC) के चुनाव में NDA को जबर्दस्त जीत मिली है। गठबंधन ने 11 में से 9 सीटें जीत ली हैं। वहीं INDIA गठबंधन के तीन प्रत्याशी खड़े थे, जिनमें 2 ही जीत सके। कांग्रेस के 7 से 8 विधायकों के क्रॉस वोटिंग करने की खबर है। 11 सीटों पर हुई काउंटिंग में भाजपा को 5, शिवसेना शिंदे और NCP अजित पवार गुट को 2-2 सीटों पर जीत मिली है। वहीं I.N.D.I.A गठबंधन से शिवसेना (UBT) और कांग्रेस ने एक-एक सीट जीती हैं। शरद पवार के समर्थन से खड़े जयंत पाटिल चुनाव हार गए हैं। 11 सीटों के लिए शुक्रवार (12 जुलाई) यानी आज ही वोटिंग हुई थी। इसके बाद काउंटिंग शुरू हुई। विधान भवन कॉम्प्लेक्स में सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक 270 विधायकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। विधान परिषद चुनाव में जीत के लिए एक कैंडिडेट को 23 विधायकों के वोट चाहिए थे। इनमें भाजपा के 103, शिवसेना (शिंदे गुट) के 38, NCP (अजित गुट) के 42, कांग्रेस के 37, शिवसेना (यूबीटी) के 15 और NCP (शरद पवार) के 10 विधायक हैं। भाजपा के सबसे ज्यादा 5 उम्मीदवार जीते 11 सीटों पर 12 उम्मीदवार मैदान में थे 26 जून को 4 सीटों पर चुनाव हुए थे; NDA-INDIA ब्लॉक को 2-2 सीटें मिली थीं महाराष्ट्र विधान परिषद की चार सीटों पर बीते 26 जून को चुनाव हुए थे। 1 जुलाई को आए नतीजों में महायुति और महाविकास अघाड़ी बराबरी पर रहीं। मुंबई ग्रेजुएट और मुंबई शिक्षक सीट पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना-UBT का दबदबा रहा। मुंबई ग्रेजुएट सीट से अनिल परब और मुंबई शिक्षक सीट से जे. एम. अभ्यंकर ने जीत हासिल की। वहीं, कोंकण ग्रेजुएट सीट पर BJP के निरंजन डावखरे ने जीत हासिल की। जबकि नासिक शिक्षक सीट से शिवसेना के किशोर दराडे ने जीत दर्ज की है। राज्यसभा की तरह विधान परिषद भी उच्च सदन, ये है चुनाव की प्रक्रिया
सीनियर जर्नलिस्ट जितेंद्र दीक्षित बताते हैं कि विधान परिषद, राज्यसभा की तरह ही उच्च सदन होता है। भारतीय संविधान की धारा 169 में ये प्रावधान है कि कई राज्य विधान परिषद को स्थापित या खत्म कर सकते हैं। अभी कुल 6 राज्यों में विधान परिषद है। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश शामिल हैं। राज्यसभा की तरह ही विधान परिषद भी एक परमानेंट सदन है। इसे बीच में डिसॉल्व नहीं किया जा सकता है। इसके लिए भी हर दो साल में चुनाव होते हैं। इन चुनावों में आम नागरिक हिस्सा नहीं ले सकते हैं। विधान परिषद के एक तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर्ड हो जाते हैं। एक तिहाई सदस्यों को विधायक चुनते हैं
महाराष्ट्र विधान परिषद के एक तिहाई सदस्य नगर निगम या महानगर पालिका के प्रतिनिधि चुनते हैं। जबकि एक तिहाई सदस्य विधानसभा में चुनकर आए विधायक चुनते हैं। 1/6 सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं, जो कला, खेल, विज्ञान, समाज सेवा जैसे क्षेत्रों से आते हैं। इसके अलावा टीचर वर्ग और ग्रेजुएट वर्ग भी अपने प्रतिनिधियों को नियुक्त करता है। विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या विधानसभा की संख्या से एक तिहाई से ज्यादा नहीं हो सकती। महाराष्ट्र में विधानसभा के 288 सदस्यों के साथ विधान परिषद में 77 सदस्य हो सकते हैं। विधान परिषद और विधानसभा के सदस्यों के लिए योग्यताएं लगभग एक जैसी हैं। हालांकि विधानसभा के लिए उम्र 25 साल और विधान परिषद के लिए 30 साल है। विधानसभा के सदस्य 5 साल के लिए चुने जाते हैं, जबकि विधान परिषद के सदस्य 6 साल के लिए निर्वाचित होते हैं। विधानसभा ज्यादा पावरफुल है। मुख्यमंत्री को विधानसभा में बहुमत सिद्ध करना होता है, वरना सरकार गिर जाती है। मुख्यमंत्री को विधान परिषद या विधानसभा में से किसी एक का सदस्य होना जरूरी है।
सीनियर जर्नलिस्ट जितेंद्र दीक्षित बताते हैं कि विधान परिषद, राज्यसभा की तरह ही उच्च सदन होता है। भारतीय संविधान की धारा 169 में ये प्रावधान है कि कई राज्य विधान परिषद को स्थापित या खत्म कर सकते हैं। अभी कुल 6 राज्यों में विधान परिषद है। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश शामिल हैं। राज्यसभा की तरह ही विधान परिषद भी एक परमानेंट सदन है। इसे बीच में डिसॉल्व नहीं किया जा सकता है। इसके लिए भी हर दो साल में चुनाव होते हैं। इन चुनावों में आम नागरिक हिस्सा नहीं ले सकते हैं। विधान परिषद के एक तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर्ड हो जाते हैं। एक तिहाई सदस्यों को विधायक चुनते हैं
महाराष्ट्र विधान परिषद के एक तिहाई सदस्य नगर निगम या महानगर पालिका के प्रतिनिधि चुनते हैं। जबकि एक तिहाई सदस्य विधानसभा में चुनकर आए विधायक चुनते हैं। 1/6 सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं, जो कला, खेल, विज्ञान, समाज सेवा जैसे क्षेत्रों से आते हैं। इसके अलावा टीचर वर्ग और ग्रेजुएट वर्ग भी अपने प्रतिनिधियों को नियुक्त करता है। विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या विधानसभा की संख्या से एक तिहाई से ज्यादा नहीं हो सकती। महाराष्ट्र में विधानसभा के 288 सदस्यों के साथ विधान परिषद में 77 सदस्य हो सकते हैं। विधान परिषद और विधानसभा के सदस्यों के लिए योग्यताएं लगभग एक जैसी हैं। हालांकि विधानसभा के लिए उम्र 25 साल और विधान परिषद के लिए 30 साल है। विधानसभा के सदस्य 5 साल के लिए चुने जाते हैं, जबकि विधान परिषद के सदस्य 6 साल के लिए निर्वाचित होते हैं। विधानसभा ज्यादा पावरफुल है। मुख्यमंत्री को विधानसभा में बहुमत सिद्ध करना होता है, वरना सरकार गिर जाती है। मुख्यमंत्री को विधान परिषद या विधानसभा में से किसी एक का सदस्य होना जरूरी है।