संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि राजनीति में अब गिरावट आ चुकी है। पहले संसद में अच्छी चर्चाएं और बहस हुआ करती थी। लेकिन अब सदन में शोर-शराबा और हंगामा ही होता है। एक-दूसरे को गालियां दो, तो ही खबर बनती है। रिजिजू आगे बोले- आज अच्छे काम करके भी वोट नहीं मिलते। अगर आप कुछ अच्छी बात करना चाहते हैं। उसको कोई सुनने वाला नहीं है। रिजिजू ने 2 अक्टूबर को राष्ट्रीय सेवा भारती और संत ईश्वर फाउंडेशन की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम में ये बातें कहीं। रिजिजू बोले- अच्छी बातों को आज मीडिया भी कवर नहीं करता
राजनीति के गिरते स्तर पर बाते करते हुए रिजिजू ने कहा- जब हम युवा सांसद थे, तब संसद में अलग ही माहौल हुआ करता था। आज संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते मैं सोचता रहता हूं कि आज इतना शोर है कि कोई भी अच्छा बोलने वालों को सुनने को तैयार नहीं है। रिजिजू ने कहा कि अन्य सांसदों से भी इस बारे में पूछता, उनका भी यही मानना है। मैं किसी का नाम नहीं लूंगा, क्योंकि यह कोई राजनीतिक मंच नहीं है। लेकिन वे कहते हैं कि अगर आप अच्छी चीजों के बारे में बात करते हैं तो मीडिया कवर नहीं करता है। अगर आप संसद में गाली देते हैं और हंगामा करते हैं, तभी यह खबर बनती है। केंद्रीय मंत्री बोले- जैसी शिक्षा मिलनी चाहिए, वैसी नहीं मिल रही
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, मैं एक बॉर्डर एरिया से आता हूं। बचपन में वहां कोई स्कूल और सड़क नहीं थी। हमारे पास कोई सुविधा नहीं थी। टीचर चार-पांच किलोमीटर पैदल यात्रा करके हमारे गांव आते थे। लेकिन, आज बच्चे कॉन्वेंट और पब्लिक स्कूलों में पढ़ते हैं। कई स्कूल ऐसे हैं जहां शिक्षा का स्तर बहुत अच्छा है। लेकिन, मुझे लगता है कि जिस तरह की शिक्षा मिलनी चाहिए, उसमें कहीं न कहीं कमी दिखाई देती है। रिजिजू बोले- सोशल मीडिया से लोगों पर गलत असर
रिजिजू ने कहा कि समाज में अच्छे लोग हैं जो देश के भविष्य के निर्माण के बारे में सोचते हैं लेकिन एक वर्ग ऐसा भी है जो कोई योगदान नहीं देता और समाज को गलत तरीके से प्रभावित करता है। फिर भी, सोशल मीडिया पर उनके बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं। मैं सोचता रहता हूं कि ऐसे लोगों को फॉलो करने का क्या मतलब है। क्या वे आदर्श लोग हैं? उन्होंने कहा कि लोगों को किसी व्यक्ति के जीवन और विचारों के बारे में जानने के बाद ही उसे फॉलो करना चाहिए। ये खबर भी पढ़ें… वक्फ संशोधन बिल संयुक्त संसदीय समिति को भेजा, रिजिजू बोले- कई विपक्षी सांसद सपोर्ट में, दबाव में बोल नहीं रहे वक्फ कानून (संशोधन) बिल को केंद्र सरकार ने 8 अगस्त को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया। इससे पहले, लोकसभा में इसे केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पेश किया था। चर्चा के दौरान उन्होंने बिल को JPC के पास भेजने का भी प्रस्ताव रखा। इस बिल का कांग्रेस, सपा, NCP (शरद पवार), AIMIM, TMC, CPI (M), IUML, DMK, RSP ने विरोध किया था। पढ़ें पूरी खबर…
राजनीति के गिरते स्तर पर बाते करते हुए रिजिजू ने कहा- जब हम युवा सांसद थे, तब संसद में अलग ही माहौल हुआ करता था। आज संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते मैं सोचता रहता हूं कि आज इतना शोर है कि कोई भी अच्छा बोलने वालों को सुनने को तैयार नहीं है। रिजिजू ने कहा कि अन्य सांसदों से भी इस बारे में पूछता, उनका भी यही मानना है। मैं किसी का नाम नहीं लूंगा, क्योंकि यह कोई राजनीतिक मंच नहीं है। लेकिन वे कहते हैं कि अगर आप अच्छी चीजों के बारे में बात करते हैं तो मीडिया कवर नहीं करता है। अगर आप संसद में गाली देते हैं और हंगामा करते हैं, तभी यह खबर बनती है। केंद्रीय मंत्री बोले- जैसी शिक्षा मिलनी चाहिए, वैसी नहीं मिल रही
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, मैं एक बॉर्डर एरिया से आता हूं। बचपन में वहां कोई स्कूल और सड़क नहीं थी। हमारे पास कोई सुविधा नहीं थी। टीचर चार-पांच किलोमीटर पैदल यात्रा करके हमारे गांव आते थे। लेकिन, आज बच्चे कॉन्वेंट और पब्लिक स्कूलों में पढ़ते हैं। कई स्कूल ऐसे हैं जहां शिक्षा का स्तर बहुत अच्छा है। लेकिन, मुझे लगता है कि जिस तरह की शिक्षा मिलनी चाहिए, उसमें कहीं न कहीं कमी दिखाई देती है। रिजिजू बोले- सोशल मीडिया से लोगों पर गलत असर
रिजिजू ने कहा कि समाज में अच्छे लोग हैं जो देश के भविष्य के निर्माण के बारे में सोचते हैं लेकिन एक वर्ग ऐसा भी है जो कोई योगदान नहीं देता और समाज को गलत तरीके से प्रभावित करता है। फिर भी, सोशल मीडिया पर उनके बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं। मैं सोचता रहता हूं कि ऐसे लोगों को फॉलो करने का क्या मतलब है। क्या वे आदर्श लोग हैं? उन्होंने कहा कि लोगों को किसी व्यक्ति के जीवन और विचारों के बारे में जानने के बाद ही उसे फॉलो करना चाहिए। ये खबर भी पढ़ें… वक्फ संशोधन बिल संयुक्त संसदीय समिति को भेजा, रिजिजू बोले- कई विपक्षी सांसद सपोर्ट में, दबाव में बोल नहीं रहे वक्फ कानून (संशोधन) बिल को केंद्र सरकार ने 8 अगस्त को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया। इससे पहले, लोकसभा में इसे केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पेश किया था। चर्चा के दौरान उन्होंने बिल को JPC के पास भेजने का भी प्रस्ताव रखा। इस बिल का कांग्रेस, सपा, NCP (शरद पवार), AIMIM, TMC, CPI (M), IUML, DMK, RSP ने विरोध किया था। पढ़ें पूरी खबर…