रिलेशनशिप- इस नवरात्रि मां दुर्गा से सीखें 9 बातें:धैर्य, सहनशीलता, शक्ति और साहस, रिश्तों से लेकर नौकरी तक हर जगह काम आएंगी

नवरात्रि भारत में सबसे ज्यादा मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक है। यह सिर्फ उपवास, गरबा और भक्ति के बारे में नहीं है। इस त्योहार को आध्यात्मिक चिंतन, पवित्रता और खुद में बदलाव लाने से भी जोड़ा जाता है। यह ऐसा पर्व है, जिसमें हर मनुष्य अपने अंदर सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश कर सकता है। शारदीय नवरात्रि 3 अक्टूबर, 2024 से शुरु हो रही है और 9 दिनों तक मनाई जाएगी। इसका समापन 11 अक्टूबर, महानवमी तिथि को होगा। इस दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवदुर्गा के 9 गुणों को अपनाकर मनुष्य अपने आपको सशक्त बना सकता है। मां दुर्गा के ये 9 गुण हैं- धैर्य, सहनशीलता, भक्ति, शक्ति, तपस्या, साहस, धर्म, पवित्रता और सिद्धि। तो आज रिलेशनशिप कॉलम में बात करेंगे मां दुर्गा के नौ स्वरूपों और उनके महत्व के बारे में। साथ ही जानेंगे कि नवरात्रि में हम सबको मां दुर्गा से कौन-से गुण सीखने चाहिए। मां दुर्गा से सीखें ये 9 गुण नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा की जाती है। मां दुर्गा एक शक्तिशाली और पवित्र देवी हैं, जिन्होंने अपने जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया और उन पर विजय प्राप्त की। उनसे हम वो सभी गुण सीख सकते हैं, जो हमें आज अपना जीवन बेहतर ढंग से जीने की ताकत और प्रेरणा दें। आज के दौर में जीवन में तकनीक की बढ़ती गति और आधुनिकता के कारण हम अच्छे गुणों को कहीं भूल गए हैं। इसका एक कारण जीवन की व्यस्तता और तनाव भी हो सकता है। चीजों को लेकर न ही हमारे अंदर धैर्य और सहनशीलता है और न ही आत्मसमर्पण और त्याग का भाव। आज हर कोई खुद को सबसे आगे देखना चाहता है। इस प्रतिस्पर्धी दुनिया में लोग अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। इस दौड़ में वे अक्सर दूसरों की भावनाओं को भी नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में मां दुर्गा के नौ स्वरूप हमें अच्छे गुण सिखाते हैं, जिससे हम जीवन को बेहतर तरह से जीना सीख सकते हैं। अपने अंदर सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। नीचे ग्राफिक में देखिए मां दुर्गा के 9 रूप और उनसे जुड़े गुण। फिर इसके बारे में विस्तार से बात करेंगे। माता शैलपुत्री यानी धैर्य और सहनशीलता मां दुर्गा का पहला रूप है शैलपुत्री, जिसे नवरात्रि के पहले दिन पूजा जाता है। यह धैर्य और सहनशीलता का प्रतीक है। यह हमें कई तरह के गुण सिखाता है, जैसेकि- माता ब्रह्मचारिणी यानी तप और संयम ब्रह्मचारिणी, मां दुर्गा का दूसरा रूप है, जो तप और संयम दिखाता है। मां ब्रह्मचारिणी, ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी हैं। माता का यह रूप हमें एक नहीं, कई गुण सिखाता है। जैसेकि- माता चंद्रघंटा यानी भक्ति और सेवा मां दुर्गा का यह तीसरा रूप है, जिसे ‘चंद्रघंटा’ कहा जाता है। यह स्वरूप शांतिदायक और कल्याणकारी है। मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्रमा है। इसीलिए इन्हें ‘चंद्रघंटा देवी’ कहते हैं। इनसे हम कई गुण सीख सकते हैं, जैसेकि- माता कूष्मांडा यानी बल और साहस नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। इनका यह रूप हमें बल और साहस सिखाता है। इसके साथ ही कई और गुण भी हैं, जो हम सीख सकते हैं, जैसेकि- स्कंदमाता यानी प्रेम, दया और करुणा स्कंदमाता को भगवान कार्तिकेय की माता कहा जाता है। उनके नाम से ही स्पष्ट है कि स्कंदमाता ‘स्कंद’ की मां हैं और अपने पुत्र से बहुत प्यार करती हैं। मां स्कंदमाता से हम सीख सकते हैं कि- माता कात्यायनी यानी धर्म और न्याय नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इन्हें ‘योद्धा देवी’ के रूप में भी जाना जाता है। मां कात्यायनी साहस और शक्ति की प्रतीक हैं। माता कालरात्रि यानी नकारात्मक चीजों का त्याग सातवें दिन मां दुर्गा के उग्र रूप ‘मां कालरात्रि’ की पूजा की जाती है। इनका यह रूप बुरी शक्तियों के विनाश और उनके चंगुल से मुक्ति का प्रतीक है। ऐसा कहा जाता है कि- माता महागौरी यानी जीवन में शुद्धता और पवित्रता माता महागौरी को पवित्रता और मासूमियत का प्रतीक माना जाता है। महागौरी से हम कई गुण सीख सकते हैं, जैसेकि- माता सिद्धिदात्री यानी आत्मसमर्पण मां दुर्गा की नौवीं शक्ति सिद्धिदात्री को माना जाता है। इनका स्वरूप हमें कई गुण सिखाता है, जैसे-