रिलेशनशिप- क्या है ‘कॉन्फिडेंस’ का मनोविज्ञान:करियर से लेकर रिश्तों की सफलता का राज है आत्मविश्वास, कैसे बढ़ाएं, 7 एक्सपर्ट टिप्स

सफलता की कई वजहें हो सकती हैं। लेकिन अगर यह पूछा जाए कि सफलता के लिए सबसे जरूरी फैक्टर क्या है तो इसका जवाब होगा- आत्मविश्वास यानी कॉन्फिडेंस। अमेरिकन साइकोलॉजिस्ट डॉ. नथानियल जिन्सर अपनी किताब ‘द कॉन्फिडेंट माइंड’ में लिखते हैं कि कोई शख्स अपने करियर, रिश्ते और पूरी जिंदगी में कैसा प्रदर्शन करेगा, यह सबसे ज्यादा उसके आत्मविश्वास पर निर्भर करता है। और तो और, दूसरे हमारे बारे में क्या राय रखेंगे, हम पर कितना भरोसा जताएंगे, यह भी हमारा कॉन्फिडेंस लेवल ही तय करता है। इतना तो निश्चित है कि किसी भी तरह की सफलता के लिए आत्मविश्वास सबसे जरूरी फैक्टर है। इसलिए आज ‘रिलेशनशिप’ कॉलम में ‘कॉन्फिडेंस’ के मनोविज्ञान को समझने की कोशिश करेंगे। साथ ही कॉन्फिडेंस बूस्ट करने के कुछ टिप्स भी जानेंगे। आखिर क्या होता है कॉन्फिडेंस यानी आत्मविश्वास अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अपने बारे में मन की सच्ची और मजबूत धारणा ही आत्मविश्वास है। यह सोच कि हम ‘जिंदगी में आने वाली किसी भी अच्छी-बुरी परिस्थिति को हैंडल कर लेंगे’ आत्मविश्वास को दर्शाती है। दूसरी ओर, भविष्य के बारे में सोचकर चिंतित होना आत्मविश्वास की कमी की निशानी हो सकती है। दूसरों से तुलना घटाए आत्मविश्वास, खुद से करें अपनी तुलना डॉ. नथानियल जिन्सर अपनी किताब में लिखते हैं कि दूसरों से खुद की तुलना आत्मविश्वास को कमजोर करती है। हालांकि तुलना करना इंसानों का स्वभाव है। इसे पूरी तरह से दूर भी नहीं किया जा सकता है। लेकिन कुछ मामलों में लोग सोशल मीडिया में या अपने आसपास किसी को देखकर हीन भावना से ग्रस्त हो जाते हैं और अपने आत्मविश्वास को कमजोर कर लेते हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिए अपनी तुलना खुद के साथ करना मददगार साबित हो सकता है। दुनिया-जहान के लोग कैसे हैं और क्या कर रहे हैं, इस चक्कर में अपने को कमतर मानने की जगह यह सोचा जाए कि कल हम कहां थे और आज कहां हैं। कल और आज के बीच हमने खुद में कुछ पॉजिटिव बदलाव किए हैं या नहीं। हमने खुद के लिए जो गोल सेट किए थे, उसे किस हद तक पूरा कर पाए हैं। निगेटिव लोगों और माहौल से बनाएं दूरी ये आत्मविश्वास के दुश्मन अगर आप किसी भी परिस्थिति के लिए खुद को तैयार रखना चाहते हैं और यह भी चाहते हैं कि आपका खुद पर भरोसा कायम रहे तो इसके लिए निगेटिव सोच वाले लोगों से दूरी बनानी होगी। वेलनेस कोच स्टेफनी वॉकर अपनी किताब ‘रीवैंप योर हेल्थ: गेन स्ट्रेंथ एंड कॉन्फिडेंस’ में लिखती हैं कि निगेटिव लोग और नकारात्मक विचारों से घिरे रहने वाले शख्स का कॉन्फिडेंस धीरे-धीरे कम होने लगता है। वह खुद के बारे में नकारात्मक सोच रखने लगता है। लोगों की निगेविट सोच समय के साथ उनकी अपनी सोच बन जाती है। कॉन्फिडेंस के लिए पुरानी बातें भूलकर नई शुरुआत जरूरी अक्सर लोगों में आत्मविश्वास का अभाव तभी होता है, जब वे पहले किसी काम में असफल हुए हों और उन्हें यह डर सता रहा हो कि कहीं वे अपने प्रयास में दोबारा असफल न हो जाएं। पुरानी बातें लोगों को नई शुरुआत करने से रोकती हैं और उनका कॉन्फिडेंस लेवल कम होता जाता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए असफलता की कड़वी यादों को पीछे छोड़ नई शुरुआत करनी होगी। असफलता से सीखते हुए यह सोच विकसित करनी होगी कि पिछली बार वाली गलती इस बार नहीं करेंगे। आत्मविश्वास क्यों है इतना जरूरी आखिर आत्मविश्वास इतना जरूरी क्यों है और अगर कोई आत्मविश्वासी हो तो इससे उसकी जिंदगी पर क्या प्रभाव पड़ेगा। डॉ. नथानियल जिन्सर के मुताबिक अगर कोई शख्स आत्मविश्वास से भरा हो तो उसकी जिंदगी में ये 4 प्रमुख सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं- आसान भाषा में समझें तो कॉन्फिडेंस हमारे ऊपर अपना विश्वास है। दुनिया की भीड़ में खुद को साबित करने और सफलता हासिल करने से पहले खुद की नजरों में सही साबित होना जरूरी है। यह आत्मविश्वास के बिना संभव नहीं।