आज (30 अक्टूबर) दीपोत्सव का दूसरा दिन रूप चौदस है। माना जाता है कि महालक्ष्मी उन्हीं लोगों पर कृपा बरसाती हैं जो साफ-सफाई से रहते हैं, इसी मान्यता की वजह से लक्ष्मी पूजा से पहले रूप चौदस पर भक्त खुद को सजाते-संवारते हैं। कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी यानी रूप चौदस को नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। इस पर्व की कहानी भगवान श्रीकृष्ण और नरकासुर नाम के असुर से जुड़ी है। आज शाम यमराज के लिए दीपदान करने की परंपरा है। इस पर्व की सुबह उबटन लगाकर स्नान किया जाता है। लोग पानी में अलग-अलग जड़ी-बूटियां मिलाकर नहाते हैं। तेल मालिश करते हैं। इस प्रकार नहाने को औषधि स्नान कहते हैं। अब जानिए उबटन बनाने और लगाने की विधि, यमराज के लिए दीपदान का मुहूर्त और विधि, रूप चौदस से जुड़ी कथाएं… अब जानिए यमराज के तीन खास मंदिरों के बारे में… दीपावली से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… दीपावली पूजा में कैसी हो महालक्ष्मी की तस्वीर : ऐसे फोटो की पूजा न करें जिसमें महालक्ष्मी अकेली हों
इस साल दीप पर्व 5 नहीं 6 दिनों का है, क्योंकि कार्तिक अमावस्या 31 अक्टूबर और 1 नवंबर दो दिन है। दीपावली की पूजा में महालक्ष्मी की तस्वीर रखने की परंपरा है, लेकिन पूजा में ऐसी तस्वीर रखने से बचना चाहिए, जिसमें महालक्ष्मी अकेली हैं। पढ़िए पूरी खबर…
इस साल दीप पर्व 5 नहीं 6 दिनों का है, क्योंकि कार्तिक अमावस्या 31 अक्टूबर और 1 नवंबर दो दिन है। दीपावली की पूजा में महालक्ष्मी की तस्वीर रखने की परंपरा है, लेकिन पूजा में ऐसी तस्वीर रखने से बचना चाहिए, जिसमें महालक्ष्मी अकेली हैं। पढ़िए पूरी खबर…